देहरादून: देश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और EVM को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। कर्नाटक के कलबुर्गी में खड़गे ने चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था से चुनी गई सरकारों की वैधता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। खड़गे ने आगे लोकसभा और सभी विधानसभाओं को भंग करने की मांग करते हुए भविष्य में चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराने की वकालत की। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष चुनाव आयोग और SIR की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।
उत्तराखंड में भी SIR को लेकर सियासत तेज
खड़गे के बयान के बाद उत्तराखंड में भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं। प्रदेश में SIR के बाद मतदाता सूची में हुए बदलाव को लेकर विपक्ष पहले से ही सवाल उठाता रहा है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के बाद उत्तराखंड में करीब 13.95 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि करीब 1.29 लाख नए मतदाता सूची में जुड़े हैं। मतदाता संख्या में इस बदलाव को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है और यह जानना चाहता है कि हटाए गए मतदाताओं की वास्तविक स्थिति क्या है।
2024 के आंकड़ों को लेकर भी सवाल
2024 के लोकसभा चुनाव के संदर्भ में भी इन आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस हो रही है। उस समय उत्तराखंड में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 84.31 लाख बताई गई थी। SIR के बाद यह संख्या घटकर करीब 71.59 लाख रह गई है। इसी अंतर को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर क्यों हुए और हटाए गए मतदाताओं के नामों के पीछे क्या कारण रहे। हालांकि मतदाता सूची में नाम हटने के कारणों की पुष्टि और प्रक्रिया की वैधता को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और निर्वाचन प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
EVM पर भी कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस समेत विपक्षी दल लंबे समय से EVM की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। खड़गे ने भी अपने बयान में आगामी चुनावों को बैलेट पेपर से कराने की मांग रखी है। अब उनके बयान के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा हो रहा है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व मौजूदा चुनावी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठा रहा है, तो क्या पार्टी 2024 में इसी प्रक्रिया के तहत चुने गए उत्तराखंड के पांच लोकसभा सांसदों के चुनाव को लेकर भी सवाल खड़े कर रही है? हालांकि यह राजनीतिक सवाल है और इसका स्पष्ट जवाब कांग्रेस की ओर से ही सामने आ सकता है। फिलहाल SIR, EVM और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।