यमुना नदी के पुनर्जीवीकरण को लेकर केंद्र सरकार अब तक हुई बैठकों में लिए गए फैसलों और उनकी प्रगति की समीक्षा करने जा रही है। इसके लिए 6 अक्टूबर को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में अहम बैठक आयोजित होगी। बैठक में यमुना से जुड़े राज्यों और अन्य संबंधित हितधारकों की ओर से अब तक किए गए कार्यों की स्थिति पर प्रेजेंटेशन दिया जाएगा। उत्तराखंड भी इस बैठक में शामिल होगा। राज्य की ओर से यमुना पुनर्जीवीकरण से जुड़े कार्यों, नदी की मौजूदा स्थिति, प्रदूषण नियंत्रण और आगे की कार्ययोजना की जानकारी प्रस्तुत की जाएगी। मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने बताया है कि वह स्वयं बैठक में शामिल होकर उत्तराखंड के प्लान पर प्रेजेंटेशन देंगे।
उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यमुना?
यमुना का उत्तराखंड से भी महत्वपूर्ण जुड़ाव है। देहरादून जिले के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों से होकर नदी आगे बढ़ती है। लखवाड़ से डाकपत्थर, कालसी और विकासनगर तक यमुना तथा इसकी सहायक टोंस नदी का बड़ा जलक्षेत्र राज्य से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र जलविद्युत की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है। डाकपत्थर बैराज से जुड़ी यमुना जलविद्युत योजना के तहत धकरानी और ढकरानी समेत विभिन्न बिजली परियोजनाएं संचालित हैं।
ऊपरी हिस्से में भी नदी की गुणवत्ता पर ध्यान
यमुना के पुनर्जीवीकरण की चर्चा आमतौर पर दिल्ली में नदी के प्रदूषण से जोड़कर देखी जाती है, लेकिन उत्तराखंड का ऊपरी क्षेत्र भी इस पूरी कवायद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य में नदी के अलग-अलग हिस्सों में पानी की गुणवत्ता में अंतर सामने आता है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2026 की जल गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार लखवाड़ तक यमुना और टोंस का पानी बेहतर गुणवत्ता वाला पाया गया, जबकि डाकपत्थर, कालसी और विकासनगर के मैदानी क्षेत्रों की ओर बढ़ने पर पानी की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई और यह स्नान योग्य श्रेणी में पहुंच गया। ऐसे में यमुना को पुनर्जीवित करने के लिए केवल निचले क्षेत्रों में प्रदूषण कम करना ही पर्याप्त नहीं होगा। नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र, जलप्रवाह, प्रदूषण के स्रोत और पूरे नदी तंत्र के संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
नमामि गंगे के तहत चल रहे हैं कई कार्य
उत्तराखंड में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत सीवेज प्रबंधन, नदी संरक्षण, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और नदी तट विकास से जुड़े विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। इनमें सीवेज प्रबंधन से संबंधित परियोजनाएं उत्तराखंड पेयजल निगम तथा नदी तट विकास समेत अन्य कार्य विभिन्न विभागों और एजेंसियों के माध्यम से किए जा रहे हैं। अब दिल्ली में होने वाली बैठक में राज्यों से पिछली बैठकों में लिए गए निर्णयों की जमीनी प्रगति का ब्यौरा लिया जाएगा। उत्तराखंड के प्रेजेंटेशन में यमुना की वर्तमान स्थिति, जल गुणवत्ता, प्रदूषण नियंत्रण, नदी क्षेत्र में किए जा रहे कार्य और भविष्य की कार्ययोजना प्रमुख विषय रह सकते हैं। मुख्य सचिव आनंद वर्धन के अनुसार, वह बैठक में स्वयं शामिल होकर उत्तराखंड में यमुना नदी के पुनर्जीवन को लेकर राज्य के प्लान की जानकारी देंगे। ऐसे में केंद्र की इस समीक्षा बैठक में उत्तराखंड की ओर से रखी जाने वाली कार्ययोजना पर भी नजर रहेगी।