किसान नेताओं ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले पूरे पंजाब में जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और मोगा में भी इसी अभियान के तहत धरना आयोजित किया गया। किसानों ने मांग की कि बरसात और बाढ़ के दौरान फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए दरियाओं के बांधों को मजबूत किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी मुकदमे रद्द करने, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा देने तथा किसानों का कर्ज माफ करने की मांग की। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बिजली संशोधन बिल 2025 और बीज बिल 2025 को वापस लेने की मांग भी उठाई गई।
किसान नेताओं का कहना है कि इन प्रस्तावित कानूनों से कृषि क्षेत्र में बड़े कॉर्पोरेट घरानों का प्रभाव बढ़ेगा और किसानों के लिए बीज एवं अन्य संसाधनों तक पहुंच कठिन हो जाएगी। उन्होंने श्रम कानूनों में किए गए बदलावों का भी विरोध करते हुए कहा कि नए लेबर कोड मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं और इससे रोजगार तथा श्रमिक अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। किसान संगठनों ने सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में चंडीगढ़ में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।