उत्तराखण्डहरिद्वार

मनसा देवी मंदिर का पुराना वीडियो फिर वायरल, चढ़ावे को लेकर उठे सवाल

हरिद्वार: उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों में चढ़ावे और दान व्यवस्था को लेकर चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बदरीनाथ मंदिर से जुड़े विवाद के बीच अब हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मंदिर परिसर में मौजूद एक व्यक्ति को श्रद्धालुओं से प्राप्त दान राशि के प्रबंधन के दौरान कथित रूप से जेब में पैसे रखते हुए दिखाया जा रहा है। हालांकि, वीडियो की सत्यता और समय को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई कुछ राशि दान पात्र में रखने के बजाय जेब में रखी जा रही थी। वीडियो सामने आने के बाद दान व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।

हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि वायरल वीडियो हाल का नहीं, बल्कि लगभग एक से दो वर्ष पुराना बताया जा रहा है। कुछ लोगों का दावा है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मंदिर से जुड़ा एक कर्मचारी है, लेकिन इस संबंध में मंदिर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। साथ ही वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हो सकी है। धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि दान राशि के दुरुपयोग से जुड़े आरोप सामने आते हैं तो स्वाभाविक रूप से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठते हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन की स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करती है।

जानकारी के अनुसार, मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने कुछ समय पहले मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते पहनने की व्यवस्था लागू की थी। बताया जाता है कि इसका उद्देश्य दान राशि के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाना और किसी भी प्रकार की आशंका या विवाद की संभावना को कम करना था। वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां कुछ लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं कई लोगों का कहना है कि पुराने वीडियो को वर्तमान घटनाओं से जोड़कर साझा किया जा रहा है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित तथ्यों की आधिकारिक जांच और पुष्टि आवश्यक है।

 

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