बड़ी खबर!, हेमंत द्विवेदी का बड़ा प्रस्ताव! BKTC का नाम बदलकर बनेगा ‘श्री बदरीनाथ-केदारनाथ प्रबंधन बोर्ड’?

उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थाओं में शामिल श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) को लेकर एक बड़ी चर्चा सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित पत्र के अनुसार समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने समिति के नाम और बोर्ड के कार्यकाल में बदलाव से जुड़े दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किए हैं। हालांकि इन प्रस्तावों को लेकर अभी तक न तो समिति और न ही शासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।

वायरल पत्र के अनुसार पहला प्रस्ताव श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) का नाम बदलने से संबंधित है। इसमें समिति का नया नाम “श्री बदरीनाथ श्री केदारनाथ प्रबंधन बोर्ड” रखने का सुझाव दिया गया है। यदि भविष्य में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह उत्तराखंड के चारधाम मंदिर प्रबंधन ढांचे में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव माना जाएगा।

दूसरा प्रस्ताव समिति के कार्यकाल से जुड़ा बताया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष का है, जबकि प्रस्ताव में इसे बढ़ाकर पांच वर्ष करने की बात कही गई है। माना जा रहा है कि इससे दीर्घकालिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक निरंतरता को मजबूती मिल सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के स्तर पर ही लिया जाएगा।

यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उत्तराखंड में इससे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने देवस्थानम बोर्ड का गठन कर मंदिर प्रबंधन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया था। उस समय तीर्थ पुरोहितों, हक-हकूकधारियों और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इसका व्यापक विरोध किया था। बाद में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने देवस्थानम बोर्ड को समाप्त कर पूर्व व्यवस्था बहाल कर दी थी।

अब अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के कथित प्रस्तावों को लेकर एक बार फिर धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पत्र में दावा किया जा रहा है कि दोनों प्रस्ताव शासन की मंजूरी के लिए भेजे गए हैं, लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक दस्तावेज या पुष्टि सार्वजनिक नहीं की गई है।गौरतलब है कि वायरल हो रहे पत्र की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसमें किए गए दावों को अंतिम या आधिकारिक निर्णय नहीं माना जा सकता। शासन अथवा बीकेटीसी की ओर से आधिकारिक बयान आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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