राष्ट्रीय

परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पर बड़ा यू-टर्न, विजय बोले- विरोध वाली जगह नहीं बनेगा एयरपोर्ट

चेन्नई से करीब 70 किलोमीटर दूर कांचीपुरम जिले के परंदूर में प्रस्तावित नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को रद्द करने के फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह मुद्दा अब सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) और विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के बीच टकराव का नया कारण बन गया है। एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर पहले से ही स्थानीय स्तर पर विरोध चल रहा था और अब सरकार के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पार्टी TVK लंबे समय से उन प्रदर्शनकारियों के समर्थन में रहे हैं, जो परंदूर में एयरपोर्ट निर्माण का विरोध कर रहे थे। स्थानीय लोगों और किसान समूहों ने एयरपोर्ट के लिए कृषि भूमि के अधिग्रहण और पर्यावरण पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि प्रस्तावित परियोजना से कई गांवों की कृषि भूमि और स्थानीय पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है।

मुख्यमंत्री विजय ने अब स्पष्ट किया है कि परंदूर एयरपोर्ट की मौजूदा योजना को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नया एयरपोर्ट किसी ऐसी जगह बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा, जहां स्थानीय लोगों की ओर से विरोध न हो। विजय के इस फैसले को उन ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, जो लंबे समय से परियोजना के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। सरकार की औपचारिक घोषणा से पहले ही कांचीपुरम जिले के एकानापुरम गांव की ग्राम सभा ने 15 अगस्त को प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री विजय के प्रति आभार जताया था। ग्राम सभा ने परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत किया। गांव के लोग वर्ष 2022 से ही इस परियोजना के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं। परंदूर एयरपोर्ट के विरोध का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बन गया था। विधानसभा चुनाव से पहले TVK ने भी परियोजना का विरोध किया था। मुख्यमंत्री विजय ने वर्ष 2025 में एकानापुरम गांव का दौरा कर एयरपोर्ट के खिलाफ आंदोलन कर रहे ग्रामीणों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की थी। उस समय भी उन्होंने स्थानीय लोगों की चिंताओं और कृषि भूमि से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।

परंदूर एयरपोर्ट परियोजना की शुरुआत तत्कालीन DMK सरकार के कार्यकाल में हुई थी। वर्ष 2022 में चेन्नई की भविष्य की विमानन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परंदूर में नया एयरपोर्ट विकसित करने की योजना सामने आई थी। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चेन्नई के मौजूदा एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करना और भविष्य की यात्री एवं कार्गो जरूरतों को पूरा करना था। हालांकि, परियोजना के सामने आने के बाद से ही स्थानीय ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि एयरपोर्ट के लिए बड़ी मात्रा में कृषि भूमि का इस्तेमाल किया जा सकता है और इससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अप्रैल 2025 में कांचीपुरम जिले के परंदूर में एयरपोर्ट बनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बावजूद स्थानीय विरोध और राजनीतिक मतभेद बने रहे। अब मुख्यमंत्री विजय की ओर से मौजूदा योजना को छोड़ने की घोषणा के बाद इस पूरे प्रोजेक्ट की दिशा बदलती नजर आ रही है।

वहीं, इस फैसले को लेकर विपक्षी DMK ने TVK और मुख्यमंत्री विजय पर हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK ने विजय को चुनौती देते हुए कहा है कि परियोजना पर सवाल उठाने के बजाय सरकार को इससे जुड़ी फाइलों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करना चाहिए। DMK का कहना है कि परंदूर एयरपोर्ट परियोजना से जुड़ी प्रक्रिया उसके कार्यकाल के दौरान शुरू हुई थी और सरकार को पूरे मामले में तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इस तरह परंदूर एयरपोर्ट का मुद्दा अब सिर्फ विकास परियोजना और पर्यावरण से जुड़ा मामला नहीं रह गया है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में TVK और DMK के बीच बढ़ते टकराव का नया केंद्र बन गया है। एक तरफ TVK इसे ग्रामीणों और किसानों की चिंताओं के समर्थन में लिए गए फैसले के तौर पर पेश कर रही है, वहीं DMK परियोजना की प्रक्रिया और फैसले को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार चेन्नई के लिए नए एयरपोर्ट की वैकल्पिक जगह के रूप में किस स्थान का प्रस्ताव रखती है और नई परियोजना में स्थानीय लोगों, किसानों तथा पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं को किस तरह शामिल किया जाता है।

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