पंजाब सरकार ने अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान विकास परियोजनाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए कुल 31,750 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। यह जानकारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पंजाब बाजार से अपेक्षाकृत अधिक ब्याज दर पर कर्ज ले रहा है। राज्य द्वारा लिए गए ऋण पर औसत ब्याज दर 7.18 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राज्यों के औसत 7.16 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है।
एसबीआई की रिपोर्ट में पंजाब को राजस्व घाटे वाले राज्यों की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम बंगाल और कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों की वित्तीय स्थिति इससे अधिक चुनौतीपूर्ण है, जहां 7.40 प्रतिशत की दर से ऋण लिया गया है।
अर्थशास्त्री प्रोफेसर बिमल अंजुम के अनुसार पंजाब को बाजार ऋण पर थोड़ा अधिक ब्याज जरूर चुकाना पड़ रहा है, लेकिन फिलहाल इसे उच्च जोखिम वाली स्थिति नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि वित्तीय अनुशासन बनाए रखा जाए और राजस्व संग्रह में सुधार हो तो राज्य आर्थिक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपट सकता है।
इस बीच पंजाब सरकार ने आगामी केंद्रीय बजट में विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है। राज्य ने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रति एकड़ सहायता राशि बढ़ाकर 15 हजार रुपये करने, सीमा सुरक्षा और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए उन्नत एंटी-ड्रोन तकनीक हेतु 1,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें केंद्र सरकार के समक्ष रखी हैं।
महंगाई के मोर्चे पर पंजाब को कुछ राहत मिली है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार राज्य की महंगाई दर घटकर 1.82 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिससे पंजाब अब देश के सबसे अधिक महंगाई वाले पांच राज्यों की सूची से बाहर हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी में कटौती और अन्य आर्थिक उपायों का इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
एसबीआई के अनुमान के अनुसार पंजाब का कुल जीएसटी राजस्व बढ़कर 28,507 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं राज्य सरकार ने केंद्र को लगभग 6,000 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व घाटे की जानकारी देते हुए सहायता की मांग की है। इसके अलावा 7,757 करोड़ रुपये के ग्रामीण विकास फंड (RDF) के लंबित भुगतान को जारी करने की भी मांग की गई है।
वित्त विभाग ने इन सभी मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र से सहयोग और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के जरिए पंजाब अपने विकास कार्यों को गति दे सकता है, हालांकि बढ़ता कर्ज और राजस्व घाटा अभी भी राज्य के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।