पोर्ट से दूर होने के कारण पंजाब के उद्योगपति निर्यात में चीन का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण उद्योगपतियों ने सरकार से सब्सिडी मांगी है ताकि प्लाईवुड उद्योग के आगे विस्तार में मदद मिल सके। पंजाब निवेशक सम्मेलन के दौरान फर्नीचर और प्लाईवुड उद्योग पर सत्र के दौरान उद्योगपतियों ने स्पष्ट किया कि देश में प्लाईवुड की मांग को पूरा करने में उद्योग समक्ष है। अब उद्योग के आगे विस्तार के लिए सिर्फ निर्यात ही मात्रा विकल्प है। क्षेत्रीय समिति ने भी नई नीति में सिफारिश की है कि निर्यात इकाई को माल ढुलाई सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए जो कि परिवहन लागत का 1 प्रतिशत और प्रति वर्ष अधिकतम 30 लाख रुपये तक होनी चाहिए। उद्योगपति अमरजीत सिंह सोहल ने कहा कि चीन में सभी प्लाईवुड उद्योग पोर्ट के पास हैं। इस कारण निर्यात में उन्हें काफी फायदा होता है जबकि पंजाब में स्थिति उलट है। यही कारण है कि परिवहन लागत को वहन करने में उद्योगपति समक्ष नहीं हैं। गुजरात के कच्छ जिले के कांडला बंदरगाह तक प्लाईवुड ले जाने के लिए उद्योगपतियों को सब्सिडी चाहिए ताकि निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके। भविष्य में प्लाईवुड उद्योग के पास निर्यात ही एकमात्र विकल्प है।