पंजाब की राजनीति में हलचल, अमित शाह से मिले सुखजिंदर सिंह रंधावा

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए रखने के हाईकमान के फैसले के बाद कई वरिष्ठ नेताओं और उनके समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। इसी बीच कांग्रेस सांसद और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात के बाद रंधावा ने स्पष्ट किया कि यह बैठक पूरी तरह पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर थी। उन्होंने बताया कि इससे पहले वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और पठानकोट जैसे सीमावर्ती जिलों में बढ़ते अपराध, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टरों की गतिविधियों और पंजाब पुलिस के कथित राजनीतिक इस्तेमाल जैसे गंभीर मुद्दों से अवगत करा चुके हैं। रंधावा ने कहा कि हालिया बैठक में उन्हीं मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और उन्होंने केंद्र से राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र प्रभावी कार्रवाई की मांग की।

रंधावा ने दावा किया कि पंजाब में गैंगस्टरों का नेटवर्क लगातार मजबूत हो रहा है और जेलों के भीतर से भी मोबाइल फोन के जरिए आपराधिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जबरन वसूली और धमकियों की घटनाएं आम होती जा रही हैं, जिससे आम जनता में भय का माहौल है। उनका मानना है कि यदि केंद्र सरकार स्वयं मानती है कि पाकिस्तान समर्थित गतिविधियां पंजाब की सुरक्षा के लिए खतरा बन रही हैं, तो इस पर सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर भी राजनीतिक हलचल तेज है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने मोरिंडा स्थित आवास पर समर्थकों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई, जिसमें भारत भूषण आशु सहित कई नेता शामिल हुए। इस बैठक को कांग्रेस के अंदर बढ़ते असंतोष और आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। उधर, रंधावा और अमित शाह की मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि भाजपा एक बड़ा परिवार है और यहां आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सांसद होने के नाते नेताओं की मुलाकातें सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं और इसे राजनीतिक रूप से अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

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