पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी हाईकमान के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कई विधायकों, पूर्व मंत्रियों और नेताओं के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और चुनाव से पहले पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
साल 2021 में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था। लेकिन अब वही चन्नी पार्टी नेतृत्व के फैसले से असहमत नजर आ रहे हैं। हालांकि उनके शक्ति प्रदर्शन में सभी बड़े नेता शामिल नहीं हुए, जिससे यह भी साफ हुआ कि कांग्रेस के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हैं।
इसी बीच सांसद और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। हालांकि रंधावा ने इसे सामान्य मुलाकात बताते हुए किसी भी तरह की राजनीतिक अटकलों को खारिज किया है। दूसरी ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि भाजपा एक बड़ा परिवार है और पार्टी में आने वाले हर नेता का स्वागत है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की इस अंदरूनी खींचतान का फायदा भाजपा उठाने की कोशिश करेगी। भाजपा लंबे समय से पंजाब में अपना जनाधार बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है और कांग्रेस की फूट को अपने लिए बड़ा अवसर मान रही है। ऐसे में चुनाव से पहले पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब सभी की नजर कांग्रेस हाईकमान के अगले फैसले पर टिकी है। यदि नेतृत्व अपने फैसले पर कायम रहता है तो चन्नी गुट आगे कोई बड़ा कदम उठा सकता है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुलदीप वैद का कहना है कि पार्टी हाईकमान पूरी स्थिति से अवगत है और दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाला नहीं है।