“जब अफसर सड़क किनारे रुककर पौधों का हाल पूछे… तभी साकार होता है हरित विकास का विजन | एमडीडीए की अनूठी कार्यसंस्कृति”

हरियाली केवल सरकारी योजनाओं, बजट और फाइलों से नहीं आती, बल्कि संवेदनशील सोच, निरंतर निगरानी और जिम्मेदार नेतृत्व से साकार होती है। कई बार एक तस्वीर उन तमाम सरकारी रिपोर्टों से कहीं अधिक प्रभावशाली होती है, जिनमें विकास के आंकड़े दर्ज होते हैं। ऐसी ही कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी कार्यालय जाते समय सड़क किनारे डिवाइडर पर पौधारोपण और रखरखाव का कार्य कर रहे कर्मचारियों के बीच रुकते हैं। वे न केवल पौधों की स्थिति का निरीक्षण करते हैं, बल्कि कर्मचारियों से संवाद करते हैं, उनकी मेहनत की सराहना करते हैं और स्वयं पौधों की देखभाल में हाथ बंटाकर यह संदेश देते हैं कि जिम्मेदारी केवल निर्देश देने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसे धरातल पर उतरकर निभाना भी उतना ही आवश्यक है।

आज देहरादून तेजी से विकसित हो रहा है। नई सड़कें बन रही हैं, चौड़ीकरण के कार्य चल रहे हैं, आधुनिक परियोजनाएं आकार ले रही हैं और शहर लगातार विस्तार कर रहा है। लेकिन विकास की इस दौड़ में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन कायम रखा जाए, तभी एक स्वस्थ, सुंदर और टिकाऊ शहर का निर्माण संभव है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “हरित उत्तराखंड” विजन के तहत एमडीडीए ने देहरादून में एक लाख पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का संरक्षण, नियमित सिंचाई, देखभाल और उनकी सतत निगरानी भी अभियान का अभिन्न हिस्सा है।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का कर्मचारियों के बीच बैठकर पौधों की देखभाल करना केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि नेतृत्व की एक सकारात्मक कार्यशैली का उदाहरण है। यह संदेश देता है कि एक प्रभावी नेतृत्व वही होता है, जो अपने तय किए गए लक्ष्यों की प्रगति को स्वयं जमीन पर जाकर देखे और टीम के साथ मिलकर काम करने में विश्वास रखे। आज के समय में जब शहरों में हरियाली लगातार कम होती जा रही है और पर्यावरणीय चुनौतियां बढ़ रही हैं, तब ऐसे प्रयास समाज को भी प्रेरित करते हैं कि पेड़-पौधे केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी हैं। उम्मीद है कि यह अभियान केवल तस्वीरों और आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में देहरादून को वास्तव में एक स्वच्छ, सुंदर, पर्यावरण-अनुकूल और हरा-भरा शहर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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