गैरसैंण के मनीष सिरसवाल बने डिप्टी जेलर, पिता ने पैदल चलकर पढ़ाई की थी; बेटे की सफलता ने गांव को किया गौरवान्वित

गैरसैंण: मेहनत और मजबूत इरादों के सामने मुश्किल परिस्थितियां भी ज्यादा देर तक टिक नहीं पातीं। उत्तराखंड के गैरसैंण क्षेत्र के डुंगरी गांव के रहने वाले 23 वर्षीय मनीष सिरसवाल ने अपनी सफलता से इसी बात को साबित किया है। सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले मनीष का चयन उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की लोअर PCS परीक्षा के माध्यम से डिप्टी जेलर के पद पर हुआ है। उनकी उपलब्धि की खबर मिलते ही गैरसैंण और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है। मनीष की सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि उनके परिवार ने शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। मनीष ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के सहयोग को दिया है।
डुंगरी गांव के मनीष का डिप्टी जेलर पद पर चयन
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से घोषित लोअर PCS के अंतिम परिणाम में डुंगरी निवासी मनीष सिरसवाल का चयन उप कारापाल यानी डिप्टी जेलर के पद पर हुआ है। परिणाम सामने आने के बाद गैरसैंण क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मनीष को बधाई दी। लगातार मेहनत, अनुशासन और पढ़ाई के प्रति समर्पण के दम पर मनीष ने यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता को क्षेत्र के युवाओं के लिए भी एक प्रेरक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
पिता ने भी संघर्षों के बीच हासिल की शिक्षा
मनीष के पिता भोला दत्त सिरसवाल पेशे से शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां दमयंती गृहिणी हैं। मनीष के पिता का अपना जीवन भी संघर्षों से भरा रहा है। बताया गया कि कम उम्र में ही पिता का साया उठ जाने और परिवार की आर्थिक स्थिति आसान नहीं होने के बावजूद भोला दत्त सिरसवाल ने पढ़ाई जारी रखी। पढ़ाई के साथ उन्हें परिवार की जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ती थीं। वह जंगल से घास और लकड़ी लाने, खेती-किसानी और घर के दूसरे काम करने के बाद रोजाना करीब 14 किलोमीटर पैदल चलकर गैरसैंण इंटर कॉलेज पढ़ने जाते थे। आज बेटे के सरकारी सेवा में चयन के बाद भोला दत्त सिरसवाल अपने पुराने संघर्षों को याद करते हुए भावुक और उत्साहित हैं। उनका कहना है कि बेटे की उपलब्धि ने उनकी वर्षों की मेहनत को सार्थक कर दिया है।
बचपन से पढ़ाई में आगे रहे मनीष
मनीष सिरसवाल की शुरुआती शिक्षा गैरसैंण स्थित सरस्वती शिशु मंदिर से हुई। इसके बाद उन्होंने कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई सरस्वती विद्या मंदिर, गैरसैंण से पूरी की। शैक्षणिक स्तर पर भी मनीष लगातार बेहतर प्रदर्शन करते रहे। उन्होंने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 93 प्रतिशत अंक हासिल किए और बोर्ड की मेरिट में 18वां स्थान प्राप्त किया। 12वीं में भी उन्होंने 90 प्रतिशत अंक हासिल किए। स्कूली शिक्षा के बाद मनीष ने दिल्ली विश्वविद्यालय से फिजिक्स में बीएससी ऑनर्स की पढ़ाई की और करीब 75 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई पूरी की, जिसमें उन्होंने 90 प्रतिशत अंक हासिल किए।
बहन भी वैज्ञानिक, परिवार में शिक्षा की मजबूत परंपरा
मनीष की बड़ी बहन निधि सिरसवाल भी विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुकी हैं। वह भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में वैज्ञानिक के पद पर चयनित हुई थीं और वर्तमान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। एक ही परिवार के भाई-बहन का अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करना क्षेत्र के लोगों के लिए भी गर्व की बात है। मनीष की सफलता के बाद उनके परिवार को लगातार बधाई संदेश मिल रहे हैं।
मनीष की उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी
लोअर PCS परीक्षा में चयन के बाद गैरसैंण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने मनीष को शुभकामनाएं दी हैं। कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के विधायक अनिल नौटियाल, पूर्व राज्य मंत्री सुरेश कुमार बिष्ट, नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी, ब्लॉक प्रमुख दुर्गा रावत, भाजयुमो के जिला अध्यक्ष पंकज गैड़ी, वरिष्ठ पत्रकार प्रेम संगेला और मनीष के भाई एवं वरिष्ठ शिक्षक जगदीश प्रसाद ढौंडियाल समेत कई लोगों ने उनकी सफलता पर खुशी जताई। मनीष की कहानी यह बताती है कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद निरंतर मेहनत, शिक्षा और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के जरिए बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता गैरसैंण क्षेत्र के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।




