उत्तराखंड के वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार और साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ ने प्रदेश में धार्मिक प्रतीकों के बढ़ते व्यवसायीकरण और कैंची धाम क्षेत्र में लगातार बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। 81 वर्षीय साहित्यकार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक खुला पत्र लिखकर अपनी चिंताओं को सार्वजनिक किया है। प्रो. बटरोही के इस पत्र के सामने आने के बाद धार्मिक पर्यटन, आस्था के व्यवसायीकरण, नैनीताल क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों और यातायात व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि अपने लंबे जीवन में पहली बार उन्हें किसी शासनाध्यक्ष को इस तरह पत्र लिखने की जरूरत महसूस हुई।
धार्मिक प्रतीकों के व्यवसायीकरण पर जताई चिंता
प्रो. बटरोही ने अपने पत्र में धार्मिक प्रतीकों और आस्था के बढ़ते व्यावसायिक इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि धार्मिक आस्था के साथ लगातार कारोबारी गतिविधियां जुड़ती गईं, तो आने वाले समय में यह स्थिति शासन-प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकती है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस नैनीताल और पर्वतीय क्षेत्र से उनके जीवन और साहित्यिक संस्कार जुड़े रहे हैं, उस क्षेत्र के बदलते स्वरूप को देखना उनके लिए पीड़ादायक है। पत्र में उन्होंने धार्मिक स्थलों की बढ़ती लोकप्रियता के साथ पैदा होने वाले दबाव, व्यावसायिक गतिविधियों और उससे स्थानीय जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चिंता जताई है।
कैंची धाम को लेकर इतिहास का भी किया जिक्र
वरिष्ठ साहित्यकार ने अपने पत्र में कैंची धाम के इतिहास और 1960 के दशक के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि उस दौर में अल्मोड़ा-नैनीताल मार्ग पर पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्थान धीरे-धीरे चर्चा में आया और बाद में यहां धार्मिक गतिविधियों का विस्तार हुआ। उन्होंने 1960 से 1966 के बीच प्रकाशित कुछ पुरानी पत्रिकाओं में कैंची धाम और उससे जुड़े घटनाक्रम पर प्रकाशित रिपोर्टों का भी जिक्र किया है। प्रो. बटरोही ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि उस दौर की पुरानी बहसों और प्रकाशित सामग्री को देखा जाए, ताकि इस क्षेत्र के विकास और धार्मिक गतिविधियों के विस्तार की पृष्ठभूमि को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
कैंची धाम के आसपास जाम से परेशान आम लोग
प्रो. बटरोही ने पत्र में कैंची धाम और नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर लगने वाले भारी जाम को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि सड़क पर लंबे समय तक यातायात बाधित रहने से आम यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनके मुताबिक, जाम की वजह से कई लोगों की बसें और ट्रेनें छूट जाती हैं, जबकि यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में घंटों का अतिरिक्त समय लग जाता है। उन्होंने इसे केवल यातायात की समस्या न मानकर आम लोगों की सुरक्षा, सुविधा और मानसिक तनाव से जुड़ा विषय बताया है। सोशल मीडिया पर भी कैंची धाम और आसपास के क्षेत्रों में यातायात जाम को लेकर समय-समय पर लोगों की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी संदर्भ में प्रो. बटरोही ने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
नैनीताल के बदलते स्वरूप पर भी चिंता
प्रो. बटरोही ने अपने पत्र में नैनीताल और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों के बदलते स्वरूप को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जिस प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश में उनका जीवन बीता, उसमें तेजी से बदलाव दिखाई दे रहा है। उनकी चिंता केवल यातायात व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्वतीय पर्यावरण, स्थानीय जीवन, धार्मिक पर्यटन और बढ़ते व्यावसायिक दबाव को लेकर भी है।उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि विकास और पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों की सुविधा, सुरक्षा और क्षेत्र की संवेदनशीलता को भी प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री से भावुक अपील
अपने पत्र के अंतिम हिस्से में प्रो. बटरोही ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत और भावुक अपील भी की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुखिया होने के नाते सरकार को आम नागरिक की सुरक्षा और उसके अस्तित्व से जुड़े सवालों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने अपने बुढ़ापे का उल्लेख करते हुए शांतिपूर्ण जीवन जीने की इच्छा जताई और मुख्यमंत्री से ऐसी परिस्थितियां बनाने की अपील की, जिनमें आम नागरिक बिना अनावश्यक परेशानी के अपने जीवन को आगे बढ़ा सके।
कौन हैं प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’?
प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ उत्तराखंड के जाने-माने हिंदी साहित्यकार हैं। वह कुमाऊं विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अध्यक्ष और प्रोफेसर भी रह चुके हैं। उनके साहित्य में पर्वतीय जीवन, सामाजिक बदलाव, विस्थापन और कुमाऊं की लोक-संस्कृति जैसे विषय प्रमुखता से दिखाई देते हैं। हिंदी साहित्य में लंबे समय तक किए गए साहित्य सृजन और सेवा के लिए उन्हें उत्तराखंड भाषा संस्थान के ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के तहत सुमित्रानंदन पंत पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 21 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाषा मंत्री सुबोध उनियाल ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया था। उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई अन्य सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं।
अब प्रशासन के रुख पर नजर
प्रो. बटरोही का खुला पत्र सामने आने के बाद कैंची धाम क्षेत्र में यातायात प्रबंधन, धार्मिक पर्यटन के बढ़ते दबाव और स्थानीय लोगों की सुविधाओं से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा में हैं। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस पत्र में उठाए गए सवालों पर क्या कदम उठाते हैं और कैंची धाम-अल्मोड़ा-नैनीताल मार्ग की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या ठोस उपाय किए जाते हैं।