उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश के छठे पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल कर लिया है। मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड यह उपलब्धि हासिल करने वाला देश का छठा राज्य बना है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘उल्लास पर्व’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) की परीक्षा सफलतापूर्वक पास करने वाले नव-साक्षरों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
25 हजार स्वयंसेवकों ने निभाई अहम भूमिका
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने के अभियान में करीब 25 हजार स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयंसेवकों ने प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों को साक्षर बनाने के अभियान को आगे बढ़ाया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अब अगले छह महीनों में उत्तराखंड को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का है। इसके लिए अभियान को और तेज किया जाएगा और जो लोग अभी भी औपचारिक रूप से साक्षरता के दायरे से बाहर हैं, उन्हें शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात यानी GER को वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाने के राष्ट्रीय लक्ष्य का भी उल्लेख किया।
‘एक बच्चा भी पढ़ेगा तो स्कूल नहीं होगा बंद’
शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिस गांव में एक भी बच्चा पढ़ने वाला होगा, वहां स्कूल बंद नहीं किया जाएगा। सरकार का फोकस ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी भी दी।
CM धामी ने प्रदेशवासियों को दी बधाई
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाना आसान नहीं था। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं बल्कि शिक्षकों, विद्यार्थियों, नव-साक्षरों, स्वयंसेवकों और अभियान से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत राज्य ने इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
‘सीखने की कोई उम्र नहीं’
नव-साक्षरों का उत्साह बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस उपलब्धि ने यह साबित किया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और आगे बढ़ने के लिए कभी देर नहीं होती। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता नहीं देती, बल्कि व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास पैदा करती है और उसके लिए विकास के नए रास्ते खोलती है। मुख्यमंत्री ने पूर्ण साक्षरता को राज्य की अंतिम मंजिल न बताते हुए इसे एक नई शुरुआत बताया।
अब डिजिटल और वित्तीय साक्षरता पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ना-लिखना या अपना नाम लिखना नहीं है। आधुनिक दौर में लोगों के लिए डिजिटल और वित्तीय रूप से जागरूक होना भी जरूरी है। उन्होंने डिजिटल साक्षरता के तहत स्मार्टफोन और कंप्यूटर का उपयोग करने की क्षमता को महत्वपूर्ण बताया। इसी तरह बैंकिंग, ऑनलाइन लेन-देन और वित्तीय सेवाओं की जानकारी को भी आज की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी के साथ-साथ रोजमर्रा के जीवन में जरूरी कौशल की जानकारी होना भी व्यापक साक्षरता का हिस्सा है।
शिक्षा के क्षेत्र में कई योजनाओं पर काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है।नंदा गौरा योजना के माध्यम से पात्र छात्राओं को आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके अलावा राज्य के 500 स्कूलों में सेंट्रल स्टूडियो और वर्चुअल क्लास की सुविधा विकसित की जा रही है, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों को भी बेहतर शैक्षणिक सामग्री और शिक्षण सुविधा मिल सके। प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के तहत अनाथ बच्चों की शिक्षा का खर्च सरकार द्वारा उठाया जा रहा है।इसके साथ ही हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के 100-100 स्कूलों में आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
उत्तराखंड के लिए नई शुरुआत
पूर्ण साक्षर राज्य बनने की उपलब्धि को उत्तराखंड के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य अब साक्षरता को केवल प्रमाण पत्र तक सीमित न रखते हुए लोगों को डिजिटल, वित्तीय और जीवनोपयोगी ज्ञान से जोड़ना है। आने वाले समय में सरकार के सामने इस उपलब्धि को बनाए रखने के साथ-साथ उच्च शिक्षा, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और दूरस्थ क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं को और मजबूत करने की चुनौती भी रहेगी।