देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। प्रदेश में दवाइयों, सर्जिकल सामग्री, इम्प्लांट्स और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए उत्तराखंड मेडिकल सप्लाईज कॉरपोरेशन (UMSC) के गठन को राज्यपाल ने भी मंजूरी दे दी है। इससे पहले 25 अगस्त को मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी। अब कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कॉरपोरेशन की स्थापना को लेकर शासनादेश जारी कर दिया गया है।
देहरादून में होगा कॉरपोरेशन का मुख्यालय
शासनादेश के मुताबिक UMSC का मुख्यालय देहरादून में स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही वर्तमान केन्द्रीय औषधि भंडार (CMSD) को भी नए कॉरपोरेशन में मर्ज किया जाएगा। दवाओं और चिकित्सा सामग्री की खरीद व्यवस्था को सरल बनाने के लिए पहले से चली आ रही विभिन्न क्रय समितियों की व्यवस्था समाप्त की जाएगी और एक निर्धारित क्रय नीति के तहत खरीद प्रक्रिया संचालित होगी। कॉरपोरेशन को राज्य सरकार की ओर से पूरी तरह वित्त पोषित किया जाएगा। शुरुआती दौर में इसे सीड कैपिटल उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं भविष्य में इसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक्विजिशन वैल्यू पर अधिकतम 5 प्रतिशत तक सेवा शुल्क (Centage) लेने का प्रावधान भी किया गया है।
मुख्य सचिव होंगे अध्यक्ष
UMSC के संचालन के लिए एक बोर्ड का गठन किया गया है। इसके अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। बोर्ड में वित्त सचिव, नियोजन सचिव, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य, निदेशक चिकित्सा शिक्षा, प्रबंध निदेशक UMSC और शासन की ओर से नामित दो स्वतंत्र निदेशक शामिल होंगे। कॉरपोरेशन के कामकाज को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए कुल 15 पदों को स्वीकृति दी गई है। इनमें प्रबंध निदेशक (IAS), महाप्रबंधक (PCS), निदेशक वित्त, दो क्रय अधिकारी, दो क्रय विशेषज्ञ, बायोमेडिकल इंजीनियर, मुख्य तकनीकी अधिकारी (CTO), दो सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक, कंपनी सचिव और लेखाकार जैसे पद शामिल हैं।
केंद्रीकृत खरीद से अस्पतालों को राहत
नए कॉरपोरेशन के गठन का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रदेश के अलग-अलग अस्पतालों को दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए बार-बार अलग टेंडर प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। Centralized Procurement के जरिए जरूरत के मुताबिक दवाओं और उपकरणों की खरीद और आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगी। सरकार के अनुसार, निर्माताओं से थोक स्तर पर खरीद होने से लागत कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
डिजिटल इन्वेंट्री से एक्सपायरी का नुकसान होगा कम
कॉरपोरेशन के तहत एकीकृत डिजिटल इन्वेंट्री सिस्टम लागू करने की योजना है। इसके जरिए अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं और मेडिकल सामग्री का स्टॉक डिजिटल तरीके से मॉनिटर किया जा सकेगा। अगर किसी अस्पताल में कोई दवा एक्सपायर होने के करीब पहुंच रही होगी और वहां उसकी जरूरत कम होगी, तो उसे समय रहते दूसरे जरूरतमंद अस्पताल में भेजा जा सकेगा। इससे दवाओं के खराब होने और सरकारी संसाधनों के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
CMS और MS को टेंडर प्रक्रिया से मिलेगी राहत
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (CMS) और चिकित्सा अधीक्षकों (MS) का काफी समय दवाओं की खरीद, टेंडर और संबंधित कागजी कार्रवाई में खर्च नहीं होगा। इससे वे अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों से जुड़े कार्यों पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, कॉरपोरेशन बनने से प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक आवश्यक दवाओं, सर्जिकल सामग्री, इम्प्लांट्स और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।