उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त नया उबाल आ गया, जब काशीपुर के मेयर दीपक बाली ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की 2022 की चुनावी हार पर एक सनसनीखेज बयान दिया। बाली ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा से चुनाव हारे नहीं थे, बल्कि उन्हें एक सोची-समझी रणनीति के तहत “हराया गया था”। मेयर के इस बयान ने भाजपा के भीतर के अंतर्विरोधों और 2022 के चुनावी समीकरणों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
भीतरघात की ओर सीधा इशारा?
मेयर दीपक बाली ने बिना नाम लिए पार्टी के भीतर और बाहर के उन समीकरणों पर सवाल उठाए हैं, जो 2022 के विधानसभा चुनाव में सक्रिय थे। उन्होंने कहा:
- भरोसा कायम था: खटीमा की जनता का सीएम धामी पर भरोसा खत्म नहीं हुआ था, बल्कि परिस्थितियां ऐसी बनाई गईं कि उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।
- राजनीतिक समीकरण: बाली के “हराया गया था” वाले जुमले को राजनीतिक गलियारों में ‘भीतरघात’ के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इतिहास: हार कर भी जो बाजीगर कहलाए
याद दिला दें कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदेश में प्रचंड बहुमत हासिल किया था, लेकिन मुख्यमंत्री धामी अपनी पारंपरिक सीट खटीमा से कांग्रेस के भुवन चंद्र कापड़ी से 6,932 वोटों से हार गए थे।
- केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा: अपनी सीट हारने के बावजूद, भाजपा हाईकमान ने “उत्तराखंड के मुख्य सेवक” के रूप में धामी के नेतृत्व पर मुहर लगाई और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी। इसके बाद उन्होंने चम्पावत उपचुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता साबित की।