उत्तराखंड राज्य को बने हुए 22 साल पूरे हो चुके है ऐसे में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने अपनी सोच, जनसेवा औऱ ईमानदारी की मिसाल कायम की है। उत्तराखंड देवभूमि जिस विकास की राहें वर्षों से देखता आ रहा था आखिर कर युवा मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल में पूर्ण होता हुआ नजर आ रहा है। भाजपा हाईकमान द्वारा उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री को बनाने का जो फैसला लिया गया था वो आज हर एक उत्तराखंडिवासियों को सुकून देता है।
आज के युग में जो उत्तराखंड का चौतरफा विकास हो रहा है, उसे कई देश प्रभावित हुए है साथ ही मुख्यमंत्री धामी को हाईकमान से लेकर और अन्य मंत्रियों का भी भरपुर सहयोग मिलता आ रहा है। अपने राजनीति जीवन में मुख्यमंत्री ने जो ताबड़तोड़ फैसले लिए है उनसे उनकी पहचान सभी मुख्यमंत्री से अलग बनाती है। मुख्यमंत्री धामी का एक ही उद्देश्य है उत्तराखण्ड के अंतिम छोर में खड़े हुए हर उत्तराखंडी को बुनियादी सुविधायें मिल सकें।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत लखनऊ विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति में कदम रखकर और एबीवीपी में विभिन्न पदों पर रहकर 2002 से 2008 तक दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे साथ ही मुख्यमंत्री धामी खटीमा से दो बार विधायक भी रहे। अपने राजनीति जीवन में जो उन्होंने कार्य किए उसे आज का युवा लाभार्थ हुआ है साथ ही युवाओं की पहली पसंद मुख्यमंत्री धामी बन गए है, मुख्यमंत्री धामी युवाओं के बीच एक मार्गदर्शक के रूप में उभरे है। मुख्यमंत्री धामी को कभी मंत्री बनने का मौका नहीं मिला लेकिन उन्होंने उत्तराखंड की सत्ता की बाग डोर संभालते ही एक से एक फैसले के बाद उत्तराखंड का नक्शा ही बदल दिया जिसके चलते मैदान से लेकर पहाड़ तक चारों तरफ धामी सरकार की तारीफ के पुल बाँधते जा रहे है।