UP Teacher Transfer: हाईकोर्ट ने अंतरजनपदीय तबादला नीति-2026 को माना वैध, शिक्षकों को बड़ा झटका

लखनऊ: बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अंतरजनपदीय तबादला नीति-2026 को वैध करार देते हुए इसे चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षक तबादले के लिए अपनी पसंद का जिला चुन सकते हैं, लेकिन किसी खास विद्यालय में नियुक्ति पाने का कानूनी अधिकार नहीं है।
22 जून के शासनादेश को दी गई थी चुनौती
न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने ऋषी कटियार समेत तीन शिक्षकों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। याचिकाओं में बेसिक शिक्षा विभाग के 22 जून 2026 के शासनादेश को चुनौती दी गई थी। इस शासनादेश में अंतरजनपदीय तबादलों के लिए जिलेवार छात्र-शिक्षक अनुपात यानी PTR को आधार बनाया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया था कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात का निर्धारण जिला स्तर पर नहीं, बल्कि विद्यालय और कक्षा स्तर पर किया जाना चाहिए।
जिलेवार PTR को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?
शिक्षकों का कहना था कि जिलेवार PTR व्यवस्था के कारण उन्हें यह तय करने में परेशानी होगी कि किस विशेष विद्यालय में तबादले के लिए आवेदन किया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि RTE के तहत विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने वाला PTR और तबादलों के लिए निर्धारित जिलेवार PTR अलग-अलग उद्देश्यों के लिए हैं।
कोर्ट के मुताबिक, तबादला नीति में जिलेवार PTR का इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि किस जिले में शिक्षकों की कमी है और कहां अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध हैं। इसी आधार पर तबादलों के लिए जिलों का चयन किया जाता है। अदालत ने माना कि इससे RTE के तहत विद्यालयों में निर्धारित शिक्षक-छात्र अनुपात पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
पति-पत्नी शिक्षकों को मिलेगी प्राथमिकता
राज्य सरकार की 4 जून 2026 की तबादला नीति में कुछ विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय तबादले का प्रावधान भी किया गया है। इसके तहत ऐसे पति-पत्नी शिक्षक, जो दोनों बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं लेकिन अलग-अलग जिलों में तैनात हैं, उनके मामलों को प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान है। खास तौर पर उन जिलों में जहां छात्र-शिक्षक अनुपात कम है और शिक्षकों की आवश्यकता अधिक है, ऐसे तबादला आवेदनों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाएगा।
मनपसंद स्कूल में पोस्टिंग का अधिकार नहीं
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि किसी शिक्षक को अंतरजनपदीय तबादला स्वतः मिलने वाला कानूनी अधिकार नहीं है। तबादला राज्य सरकार की नीति और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर किया जाता है। इसका मतलब है कि शिक्षक नीति के तहत किसी जिले में तबादले के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उस जिले के भीतर अपनी पसंद के किसी खास विद्यालय में नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते। रिक्त पद और सरकार की तबादला नीति के प्रावधानों के अनुसार ही उनके आवेदन पर विचार किया जाएगा।
हाईकोर्ट के फैसले से क्या साफ हुआ?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की अंतरजनपदीय तबादला नीति-2026 और जिलेवार PTR व्यवस्था पर कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है। कोर्ट ने नीति को वैध मानते हुए शिक्षकों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं।




