उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में पहले से लागू हैं नए न्यूनतम वेतनमान

उत्तराखंड में न्यूनतम वेतन बढ़ोतरी की खबर निकली भ्रामक, श्रम विभाग ने जारी की सफाई

उत्तराखंड में श्रमिकों के न्यूनतम वेतन बढ़ोतरी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों पर अब श्रम विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। विभाग ने साफ कहा है कि राज्य में न्यूनतम वेतन बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है। श्रम आयुक्त पी.सी. डुम्का ने लोगों और श्रमिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें।

₹781 दैनिक वेतन लागू होने की खबरों का किया खंडन

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से श्रमिकों के लिए ₹781 प्रतिदिन न्यूनतम वेतन लागू कर दिया गया है। इस दावे को लेकर श्रमिकों और उद्योगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी। अब श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

पहले से तय हैं न्यूनतम वेतन दरें

श्रम विभाग ने बताया कि उत्तराखंड सरकार पहले ही इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए न्यूनतम वेतन दरें तय कर चुकी है। इसके अलावा नवंबर महीने में परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) भी घोषित किया जा चुका है। विभाग के अनुसार वर्तमान में लागू वेतन दरें ही प्रभावी हैं।

पड़ोसी राज्यों से अधिक है उत्तराखंड का वेतनमान

श्रम आयुक्त पी.सी. डुम्का ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड में पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक न्यूनतम वेतन निर्धारित किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार अकुशल श्रमिकों के लिए ₹13,800 मासिक वेतन तय है। वहीं अर्द्धकुशल श्रमिकों को ₹15,100 और कुशल श्रमिकों को ₹16,900 मासिक वेतन दिया जा रहा है।

श्रमिकों के हितों को लेकर सरकार गंभीर

श्रम विभाग ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों के हितों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और समय-समय पर श्रमिकों के वेतन और सुविधाओं की समीक्षा की जाती है। विभाग ने कहा कि यदि भविष्य में किसी प्रकार की वेतन वृद्धि या संशोधन किया जाएगा, तो उसकी आधिकारिक सूचना जारी की जाएगी।

सोशल मीडिया अफवाहों से सावधान रहने की अपील

विभाग ने श्रमिकों और आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी जानकारी पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर करें। विभाग ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही गलत खबरें भ्रम की स्थिति पैदा कर रही हैं, इसलिए केवल सरकारी आदेशों और आधिकारिक सूचनाओं को ही सही माना जाए।

उद्योगों और कर्मचारियों में फैला था भ्रम

₹781 प्रतिदिन वेतन लागू होने की अफवाह के बाद कई उद्योगों और श्रमिक संगठनों में चर्चा शुरू हो गई थी। कुछ जगहों पर कर्मचारियों ने नए वेतनमान की मांग भी उठानी शुरू कर दी थी। अब विभाग की सफाई के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है।

आधिकारिक आदेश के बिना बदलाव संभव नहीं

श्रम विभाग ने दोहराया कि न्यूनतम वेतन में किसी भी प्रकार का बदलाव केवल सरकारी अधिसूचना और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद ही लागू किया जा सकता है। फिलहाल ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।

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