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डेजर्ट टाइगर्स @60: भारतीय वायुसेना की 220 स्क्वाड्रन मना रही है अपनी डायमंड जुबली।

भारतीय वायुसेना की सबसे घातक और पराक्रमी यूनिट्स में से एक, 220 स्क्वाड्रन (डेजर्ट टाइगर्स) इस वर्ष अपनी स्थापना की डायमंड जुबली मना रही है। पिछले छह दशकों से सरहदों की सुरक्षा में मुस्तैद इस स्क्वाड्रन ने 1965 के युद्ध से लेकर हालिया मई 2025 के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाया है।

ऑपरेशन सिंदूर: पाक वायुसेना के नापाक मंसूबों को किया ध्वस्त

हाल ही में मई 2025 में जब सीमा पर तनाव के बीच ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया गया, तब डेजर्ट टाइगर्स ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता सिद्ध की:

  • घुसपैठ नाकाम: स्क्वाड्रन ने पाकिस्तानी ड्रोन्स और जंगी जहाजों के जरिए भारतीय सैन्य अड्डों व सिविल इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश को पूरी तरह विफल कर दिया।

  • दुश्मन पर प्रहार: इस अभियान के दौरान डेजर्ट टाइगर्स ने न केवल बचाव किया बल्कि आक्रामक रुख अपनाते हुए दुश्मन के जंगी जहाजों को भी निशाना बनाया।

ऐतिहासिक सफर: वैम्पायर से सुखोई-30 MKI तक

220 स्क्वाड्रन का इतिहास भारतीय वायुसेना के तकनीकी विकास की कहानी कहता है:

कालखंड विमान का बेड़ा मुख्य पड़ाव / युद्ध
1965 डी. हॉविलैंड वैम्पायर पालम स्टेशन से छम्ब सेक्टर में दुश्मन पर भीषण हमला।
1969 HF-24 मारुत (देसी) HAL द्वारा निर्मित पहले स्वदेशी लड़ाकू विमान से लैस।
1971 मारुत भारत-पाक युद्ध में थल सेना को क्लोज एयर सपोर्ट दिया।
1981 मिग-23 बाइसन जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तैनाती और रेगिस्तानी कमान।
1997 सुखोई-30 MKI हलवारा (पंजाब) स्थानांतरण और सबसे घातक मारक क्षमता।

कारगिल और ऑपरेशन सफेद सागर

साल 1999 के कारगिल युद्ध (ऑपरेशन सफेद सागर) में डेजर्ट टाइगर्स ने दुर्गम पहाड़ियों के बीच छिपे घुसपैठियों को खदेड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह मिशन इतिहास के सबसे कठिन एयर ऑपरेशन्स में से एक माना जाता है, जहाँ 220 स्क्वाड्रन ने अपनी अचूक सटीकता का परिचय दिया था।

वरिष्ठ अधिकारियों ने दी बधाई

डायमंड जुबली के इस गौरवशाली अवसर पर वेस्टर्न एयर कमांड के सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर एयर मार्शल जेएस मान और ईस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया ने स्क्वाड्रन के पराक्रम को सलाम करते हुए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

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