देहरादून में बेरोजगार युवाओं का सचिवालय कूच, पुलिस से धक्का-मुक्की; भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर प्रदर्शन तेज

राजधानी देहरादून में भर्ती प्रक्रियाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में युवाओं ने प्रदर्शन किया। उत्तराखंड बेरोजगार संघ के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी सचिवालय की ओर कूच करने निकले, जहां पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी देखने को मिली। जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने राज्य में लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को शीघ्र शुरू करने, भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कराने तथा रोजगार संबंधी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरे, जिससे क्षेत्र में कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।
सचिवालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। मौके पर भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए बैरिकेडिंग की गई, जबकि एहतियातन वाटर कैनन भी तैयार रखा गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई भर्ती प्रक्रियाएं लंबे समय से लंबित हैं, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान करने की मांग उठाई।प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे छात्र आंदोलनों के समर्थन में भी अपनी आवाज बुलंद की। हालांकि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी और दोनों पक्षों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
- उत्तराखंड पुलिस भर्ती की वेटिंग लिस्ट जल्द जारी की जाए।
- उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की लंबित भर्ती प्रक्रियाएं शीघ्र शुरू की जाएं।
- भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- रुकी हुई सभी सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट समयसीमा घोषित की जाए।
- युवाओं को समयबद्ध और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का भरोसा दिया जाए।
फिलहाल मौके पर पुलिस और प्रशासन की निगरानी जारी है। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।




