रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे में हाल ही में हुए विवाद और निहंगों के हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद खुफिया तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय संगठनों का कहना है कि कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद प्रशासन और खुफिया एजेंसियों को पहले से अधिक सतर्क रहना चाहिए था, लेकिन इसके बावजूद नगरासू गुरुद्वारे में कई दिनों तक चल रही गतिविधियों की समय रहते जानकारी नहीं जुटाई जा सकी। अब पूरे घटनाक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर बहस तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान सात निहंग नगरासू गुरुद्वारे में पहुंचे थे। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति का कहना है कि ये लोग घटना से करीब तीन दिन पहले गुरुद्वारे में पहुंचे और सामान्य श्रद्धालुओं तथा सेवादारों की तरह परिसर में रह रहे थे। इस दौरान उनकी गुरुद्वारा प्रबंधन के साथ कई दौर की बातचीत भी हुई। बताया जा रहा है कि निहंग बड़ी संख्या में अपने समर्थकों और अन्य लोगों को गुरुद्वारे में ठहराने की अनुमति मांग रहे थे। हालांकि प्रबंधन समिति ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।
प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों का दावा है कि शुरुआती विवाद के दौरान निहंगों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी थी। इससे यह आभास हुआ कि मामला शांत हो गया है और आगे कोई तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। लेकिन कुछ समय बाद हालात अचानक बदल गए। आरोप है कि निहंगों ने गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों पर कब्जा जमा लिया और परिसर में तनावपूर्ण माहौल पैदा हो गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया।
सूत्रों के मुताबिक विवाद में शामिल निहंगों में से एक व्यक्ति पहले लंबे समय तक नगरासू गुरुद्वारे में सेवादार के रूप में कार्य कर चुका था। उसे गुरुद्वारे की भवन संरचना, प्रवेश मार्गों, कमरों और आंतरिक व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी थी। माना जा रहा है कि इसी जानकारी का लाभ उठाकर समूह ने कम समय में गुरुद्वारे के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच बनाई और वहां लंबे समय तक डटे रहने में सफलता हासिल की। इस पहलू ने भी सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
घटनाक्रम के दौरान सोशल मीडिया की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जानकारी सामने आई है कि कर्णप्रयाग विवाद के बाद विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार संदेश, पोस्ट और वीडियो साझा किए जा रहे थे। इनमें कुछ पोस्टों में लोगों से एकजुट होने और 25 जून को कर्णप्रयाग पहुंचने की अपील किए जाने की भी बातें सामने आई हैं। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां संभावित तनाव और उसके प्रभाव का सटीक आकलन नहीं कर सकीं। यही कारण है कि अब खुफिया तंत्र की सक्रियता और सूचना संकलन प्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाती और गतिविधियों पर समय रहते ध्यान दिया जाता तो विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता था। लोगों का मानना है कि धार्मिक स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में खुफिया नेटवर्क को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
फिलहाल जिला प्रशासन, पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हुई हैं। क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने, अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को देने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।