उधमसिंह नगर में वर्ष 2025 के दौरान गंभीर आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि की कम दर ने कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार हत्या, लूट, डकैती और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के मामलों में अदालतों ने केवल 31 प्रतिशत मामलों में ही आरोपियों को दोषी ठहराया, जबकि अधिकांश मामलों में आरोपी बरी हो गए। आंकड़े यह भी बताते हैं कि जिले में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
काशीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नदीम उद्दीन द्वारा मांगी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में उधमसिंह नगर की विभिन्न अदालतों ने कुल 9,165 आपराधिक मामलों का निस्तारण किया। सत्र न्यायालयों में भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज 150 गंभीर मामलों का फैसला हुआ, जिनमें केवल 40 मामलों में सजा सुनाई गई जबकि 91 मामलों में आरोपी बरी हो गए। वहीं 19 मामलों को दाखिल दफ्तर अथवा कैश कर दिया गया। इस आधार पर गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि दर केवल 31 प्रतिशत दर्ज की गई।
दूसरी ओर अन्य अधिनियमों के तहत दर्ज मामलों में अदालतों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। सत्र न्यायालयों द्वारा निस्तारित 542 मामलों में 351 मामलों में सजा सुनाई गई और 114 मामलों में आरोपी बरी हुए। इन मामलों में दोषसिद्धि दर 75 प्रतिशत रही। अधीनस्थ न्यायालयों में भी आईपीसी से जुड़े मामलों में 73 प्रतिशत दोषसिद्धि दर दर्ज की गई, जहां 341 मामलों में सजा और 126 मामलों में रिहाई हुई। वहीं अन्य अधिनियमों से जुड़े मामलों में 96 प्रतिशत तक दोषसिद्धि दर दर्ज की गई।
बाल यौन उत्पीड़न से जुड़े पॉक्सो मामलों की स्थिति भी चिंताजनक रही। विशेष पॉक्सो न्यायालय ने वर्ष 2025 में 141 मामलों का निस्तारण किया, जिनमें केवल 27 मामलों में सजा हुई जबकि 99 मामलों में आरोपी बरी हो गए। 15 मामले दाखिल दफ्तर किए गए। इस प्रकार पॉक्सो मामलों में दोषसिद्धि दर महज 21 प्रतिशत रही। इतना ही नहीं, वर्ष की शुरुआत में पॉक्सो अदालत में 645 मामले लंबित थे, जो वर्ष के अंत तक बढ़कर 692 हो गए।
नशीले पदार्थों की तस्करी और एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामलों में सबसे बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। विशेष एनडीपीएस अदालत ने 117 मामलों का निस्तारण किया, जिनमें 73 मामलों में सजा और 14 मामलों में रिहाई हुई। यहां दोषसिद्धि दर 84 प्रतिशत रही। हालांकि लंबित मामलों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई और वर्ष के अंत तक ऐसे मामलों की संख्या 1,213 तक पहुंच गई।
विशेष गैंगस्टर और एफटीएससी अदालतों के आंकड़े भी मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। गैंगस्टर अदालत ने पांच मामलों का निस्तारण किया, जिनमें केवल एक मामले में सजा हुई। वहीं एफटीएससी अदालत ने 40 मामलों का निस्तारण किया, लेकिन केवल दो मामलों में दोषसिद्धि हो सकी। यहां दोषसिद्धि दर महज 13 प्रतिशत रही।
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 की शुरुआत में उधमसिंह नगर के सत्र न्यायालयों में 3,465 मामले लंबित थे। वर्ष भर में 1,021 नए मामले दर्ज हुए और लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 3,794 हो गई। हालांकि अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित मामलों में कुछ कमी दर्ज की गई और संख्या 30,716 से घटकर 27,246 रह गई।
आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नदीम उद्दीन का कहना है कि गंभीर अपराधों और पॉक्सो मामलों में कम दोषसिद्धि दर पुलिस जांच, साक्ष्य संकलन और अभियोजन प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। उनका मानना है कि यदि जांच और अभियोजन तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाए तो दोषसिद्धि दर में सुधार संभव है और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।