उत्तराखण्ड

आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई ने किया सुसाइड

जाने-माने प्रोडक्शन डिजाइनर नितिन देसाई ने कथित रूप से सुसाइड कर लिया है। शुरुआती जांच में ये सामने आ रहा है कि वह डिप्रेशन से जूझ रहे थे। नितिन देसाई के निधन पर MLA महेश बाल्दी ने विधानसभा में बताया कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। नितिन एक्टर, फिल्ममेकर, आर्ट डिजाइनर, सेट डिजाइनर और प्रोडक्शन डिजाइनर के रूप में मशहूर रहे हैं। उनकी लोकप्रियता और काम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें चार बार नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। उन्होंने फिल्मों में कामकाज के साथ साथ ND स्टूडियो की स्थापना भी की थी।

 

नितिन देसाई ने न केवल प्रोडक्शन डिजाइनर के रूप में काम किया बल्कि कई फिल्मों में एक्टिंग भी की और डायरेक्शन भी किया। उन्होंने बतौर एक्टर ‘हम सब एक हैं’, ‘दाउद: फन ऑन द रन’ व ‘हेलो जय हिंद’ जैसे कुछ प्रोजेक्ट्स में एक्टिंग की थी। वहीं साल 2011 में आई फिल्म हेलो जय हिंद’ को उन्होंने डायरेक्ट भी किया था। फिर उन्होंने साल 2012 में आई मराठी फिल्म ‘अजींथा’ का डायरेक्शन संभाला था।

आर्ट डायरेक्टर के रूप में नितिन देसाई को खूब फेम मिला था। वह साल 1989 में इस क्षेत्र में काम करते आ रहे थे। ‘परिंदा’, ‘आ गले लग जा’, ‘अकेले हम अकेले तुम’, ‘विजेता’, ‘दिलजले’, ‘माचिस’, ‘लगान’, ‘इश्क’, ‘जंग’, ‘मिशन कश्मीर’, ‘वन 2 का 4’, ‘राजू चाचा’, ‘मुन्नाभाई MBBS’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘दोस्ताना’, ‘गॉड तुस्सी ग्रेट हो’, ‘देवदास’, ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’, ‘पानीपत’ से लेकर ‘हम दिल दे चुके सनम’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में उन्होंने आर्ट डायरेक्टर का काम संभाला था।

वैसे तो नितिन देसाई ने अपने शानदार करियर में कई अवॉर्ड्स जीते। मगर वो ऐसे आर्ट डायरेक्टर थे जिन्होंने एक नहीं बल्कि चार-चार नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए थे। उन्हें पहला राष्ट्रीय पुरस्कार साल 1999 में आई फिल्म ‘डॉ बाबासाहेब अंबेडकर’, फिर दूसरा ‘हम दिल दे चुके सनम’ और तीसरा ‘लगान’ और चौथा ‘देवदास’ के लिए मिला था।

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