उत्तराखण्ड

घास काटने वाली पहाड़ की बेटी प्रेमा रावत का टी-20 वर्ल्ड कप टीम में चयन

उत्तराखंड की बेटियों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के दूरस्थ सुमटी गांव की रहने वाली प्रेमा रावत का भारतीय महिला क्रिकेट टीम में चयन हो गया है। अब वह आगामी टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की जर्सी पहनकर मैदान में उतरेंगी। यह उपलब्धि न केवल प्रेमा रावत और उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे उत्तराखंड और विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

पहाड़ के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय टीम तक का सफर तय करने वाली 24 वर्षीय प्रेमा रावत की कहानी संघर्ष, समर्पण और जुनून की मिसाल है। बचपन में वह अपने भाइयों के साथ खेतों और खुले मैदानों में क्रिकेट खेला करती थीं। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही लड़की एक दिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनेगी और विश्व कप जैसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करेगी।

प्रेमा रावत का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने के लिए वह घास काटने और खेतों के काम में भी सहयोग करती थीं। पहाड़ की कठिन जीवनशैली के बीच उन्होंने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। खेल के प्रति उनका जुनून लगातार बढ़ता गया और उन्होंने क्रिकेट को ही अपना लक्ष्य बना लिया।

प्रेमा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के प्राथमिक विद्यालय में की। दूसरी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उनका परिवार बरेली चला गया। उनके पिता केदार सिंह रावत भारतीय वायुसेना में कार्यरत रहे हैं, जबकि उनकी माता बसंती देवी गृहिणी हैं। परिवार ने हमेशा उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित किया और आगे बढ़ने का हौसला दिया।

घरेलू क्रिकेट में प्रेमा रावत ने लगातार शानदार प्रदर्शन कर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने उत्तराखंड की अंडर-19, अंडर-23 और सीनियर महिला टीमों का प्रतिनिधित्व किया। अपनी प्रभावशाली लेग स्पिन गेंदबाजी और मैच जिताने वाले प्रदर्शन के दम पर उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। उनकी गेंदबाजी विरोधी बल्लेबाजों के लिए लगातार चुनौती साबित होती रही है।

घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद प्रेमा को इंडिया-ए टीम में भी खेलने का मौका मिला। हाल ही में आयोजित महिला एशिया कप राइजिंग स्टार्स टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 विकेट हासिल किए। उनके इस प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया और आखिरकार उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह मिल गई।

प्रेमा रावत की सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यदि मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प हो तो पहाड़ के दूरस्थ गांव से निकलकर भी विश्व मंच तक पहुंचा जा सकता है। आज प्रेमा रावत लाखों युवाओं, खासकर पहाड़ की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके चयन से पूरे उत्तराखंड में खुशी का माहौल है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि वह विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम और ऊंचा करेंगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Parvat Sankalp News