राष्ट्रीय

‘संविधान हत्या दिवस’ पर पीएम मोदी ने याद किया आपातकाल का काला अध्याय

देश में लगाए गए आपातकाल (Emergency) की 51वीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया। ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला था। इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों तथा समाजसेवियों को जेलों में बंद कर दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने संदेश में कहा कि आज का दिन उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है जिन्होंने आपातकाल के कठिन दौर में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाया गया और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया गया, लेकिन अनेक साहसी नागरिकों ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। उन्होंने देशवासियों से संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प दोहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है जहां लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान सर्वोपरि हो।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया, जिसमें स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया गया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता ही सुख, शांति और सर्वोच्च उपलब्धि का मार्ग प्रशस्त करती है और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी ‘संविधान हत्या दिवस’ पर आपातकाल का विरोध करने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 में लागू किया गया आपातकाल भारतीय इतिहास के सबसे अंधकारमय अध्यायों में से एक था। उस कठिन समय में लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया था, जो 21 मार्च 1977 तक प्रभावी रहा। लगभग 21 महीने तक चले इस दौर में कई लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया था। भारतीय राजनीति के इतिहास में इसे सबसे विवादास्पद और चर्चित घटनाओं में से एक माना जाता है। आज, आपातकाल की 51वीं बरसी पर देशभर में लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के संकल्प को दोहराया जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Parvat Sankalp News