उत्तराखण्ड

2027 की जंग से पहले BJP में ‘अपनों’ की नाराजगी, क्या महेंद्र भट्ट संभाल पाएंगे मोर्चा?

देहरादून: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। जहां एक ओर सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनावी रैलियों और सांगठनिक मजबूती का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कैबिनेट विस्तार को लेकर बढ़ता सस्पेंस पार्टी के लिए ‘गले की हड्डी’ बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की तमाम कोशिशों के बावजूद आलाकमान से अब तक ‘हरी झंडी’ न मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है।

शुभ मुहूर्त के इंतजार में बीता साल, विधायकों का बढ़ा मलाल

कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं लंबे समय से सियासी गलियारों में तैर रही हैं। कभी नवरात्रि, कभी दीपावली तो कभी नए साल को ‘शुभ मुहूर्त’ बताया गया, लेकिन मंत्रिमंडल की खाली कुर्सियां आज भी खाली ही हैं। मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे दिग्गज विधायकों का सब्र अब जवाब देने लगा है, जिसका सीधा असर संगठन की एकजुटता पर पड़ता दिख रहा है।

 महेंद्र भट्ट के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं 2027

पार्टी के भीतर पनप रही गुटबाजी और नेताओं की दबी जुबान में नाराजगी संगठन के लिए खतरे की घंटी है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘अपनों को मनाना’ है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि दिग्गजों की नाराजगी दूर नहीं हुई, तो 2027 के रण में पार्टी को भीतरघात का सामना करना पड़ सकता है।

 तीन बड़े सवाल, जिनका जवाब संगठन को देना होगा:

  1. हाईकमान की चुप्पी क्यों? आखिर क्यों धामी कैबिनेट के विस्तार की फाइल दिल्ली में अटकी हुई है? क्या दिल्ली नेतृत्व किसी बड़े फेरबदल की योजना में है?

  2. क्या अब बहुत देर हो चुकी है? चुनाव के ऐन वक्त पर यदि विस्तार होता है, तो क्या नए मंत्रियों को काम दिखाने का पर्याप्त मौका मिलेगा?

  3. भीतरघात का डर: सरकार विरोधी लहर (Anti-incumbency) और आंतरिक कलह के बीच बीजेपी अपने नाराज नेताओं को कैसे संतुष्ट करेगी?

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