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वीरेंद्र सहवाग के भाई विनोद सहवाग गिरफ्तार, सात करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में न्यायिक हिरासत में भेजे गए

चेक बाउंस के मामले में पेश नहीं होने पर अदालत से भगौड़ा घोषित हो चुके विनोद सहवाग को मनीमाजरा थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। विनोद सहवाग भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्टार क्रिकेटर और मुल्तान के सुल्तान कहे जाने वाले वीरेंद्र सहवाग का भाई है।

उनके खिलाफ सात करोड़ रुपये के चेक बाउंस का मामला चल रहा है। पुलिस ने उसको अदालत में पेश किया, जहां से उसको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले की जानकारी देते हुए श्री नैना प्लास्टिक कंपनी के वकील विकास सागर ने बताया कि उनकी कंपनी से जाल्टा कंपनी ने सात करोड़ रुपये का मैटीरियल लिया था।

उसकी पेमेंट करने के लिए 2018 में एक-एक करोड़ रुपये के सात चेक कंपनी को दिए गए थे। कंपनी ने जब यह चेक बैंक में लगाए तो खाते में रुपये नहीं होने के कारण वह बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता कंपनी ने जाल्टा कंपनी को इसके बारे में सूचित किया, लेकिन दो महीने बाद जब चेक क्लीयर नहीं हुए तो कंपनी और डायरेक्टर्स के खिलाफ लीगल नोटिस दिया और 15 दिनों में पेमेंट करने की मांग की। लीगल नोटिस के बाद भी कंपनी ने पेमेंट नहीं दी तो उन्होंने चेक बाउंस का केस फाइल कर दिया।

2023 सितंबर में दर्ज हुआ था केस

कंपनी की ओर से दी गई शिकायत पर 25 सितंबर 2023 को दिल्ली की जाल्टा फूड एंड बेवरेजेस और उनके तीन डायरेक्टर्स विनोद सहवाग, विष्णु मित्तल और सुधीर मल्होत्रा के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। केस में पिछले साल लोअर कोर्ट ने विनोद सहवाग समेत तीनों डायरेक्टर्स को बतौर आरोपित कोर्ट में पेश होने के लिए समन किए थे। लेकिन अब उन्होंने कोर्ट के समनिंग ऑर्डर के खिलाफ सेशंस कोर्ट में रिवीजन पिटीशन फाइल कर दी है। सहवाग के भाई ने रिवीजन पिटीशन में कहा कि उन्हें आरोपित बनाए जाने का फैसला गलत है। वे इस कंपनी में न तो डायरेक्टर हैं और न ही कर्मचारी।

विनोद सहवाग के वकील ने जमानत अर्जी में कहा कि वे जाल्टा फूड एंड बेवरेजस कंपनी में निदेशक ही नहीं हैं। उनके खिलाफ चेक बाउंस के सात मामले चल रहे हैं, जिनके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हुई है। वह जानबूझकर अदालत की कार्रवाई में गैरहाजिर नहीं हुए थे। वे अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वे अब हर तारीख पर पेश होने के लिए तैयार हैं, इसलिए उन्हें नियमित जमानत दी जाए। इस केस में अन्य आरोपित को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसलिए उन्हें और अधिक दिनों तक जेल में रखना सही नहीं होगा।

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