PUNJAB

पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर: बंगा विधायक डॉ. सुक्खी का इस्तीफा, ‘पावन स्वरूपों’ के विवाद के बाद छोड़ा कैबिनेट रैंक।

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। बंगा से विधायक डॉ. सुखविंदर कुमार सुक्खी ने ‘पंजाब स्टेट कंटेनर एंड वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन’ के अध्यक्ष पद और अपना कैबिनेट रैंक त्याग दिया है। डॉ. सुक्खी का यह इस्तीफा मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस हालिया बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के लापता स्वरूपों के संबंध में बंगा स्थित एक धार्मिक स्थल पर सवाल उठाए थे।

क्या है विवाद की मुख्य जड़?

हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के लापता 328 स्वरूपों की जांच कर रही SIT को बंगा के पास एक धार्मिक स्थान से 169 स्वरूप बरामद हुए हैं। सीएम के अनुसार, इनमें से 139 स्वरूपों का कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं था। इस बयान के बाद उस धार्मिक स्थल की मर्यादा और रख-रखाव पर सवाल उठने लगे थे।

विधायक का भावनात्मक संदेश और इस्तीफा

डॉ. सुक्खी, जो लंबे समय से ‘नाभ कमल राजा साहिब’ स्थान के प्रति अटूट श्रद्धा रखते हैं, इस प्रचार से बेहद आहत नजर आए। सोशल मीडिया पर जारी एक भावुक वीडियो में उन्होंने कहा:

“राजा साहिब का दरबार मेरे लिए राजनीति का अखाड़ा नहीं, बल्कि अटूट आस्था का केंद्र है। पिछले कुछ दिनों से यहाँ की मर्यादा को लेकर जो अफवाहें फैलाई जा रही हैं, उससे संगत में भारी रोष है। मैं मुख्यमंत्री और ‘आप’ नेतृत्व को सच्चाई बताने और सभी भ्रम दूर करने के लिए यह पद छोड़ रहा हूँ।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे उस पवित्र स्थान पर पछतावा करने और आशीर्वाद लेने जा रहे हैं, जहाँ वे वर्षों से नतमस्तक होते रहे हैं।

राजनीतिक और कानूनी पेंच

डॉ. सुक्खी का यह कदम ऐसे समय में आया है जब उनकी विधानसभा सदस्यता पर पहले से ही हाई कोर्ट में तलवार लटकी हुई है।

  • दल-बदल का मामला: 2024 में शिरोमणि अकाली दल (SAD) छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल होने के कारण उनके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
  • सदस्यता रद्द करने की मांग: याची का तर्क है कि सुक्खी ने जनता का जनादेश अकाली दल के नाम पर लिया था, इसलिए ‘दल-बदल कानून’ के तहत उन्हें विधायक पद से इस्तीफा देना चाहिए था। विधानसभा स्पीकर से भी उनकी सदस्यता रद्द करने का आग्रह किया गया है।

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