बेरीनाग में पहाड़ी दरकने से थल-उडियारी मार्ग बंद, सैकड़ों वाहन 5 घंटे फंसे; JCB भी हुई खराब, लोगों में भारी आक्रोश

बेरीनाग: पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग क्षेत्र में रविवार को थल-उडियारी बैंड- बेरीनाग मोटर मार्ग पर चुनी पातल के पास बड़ा भू-स्खलन होने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। बताया जा रहा है कि माइक्रोहाइडल परियोजना की नहर क्षतिग्रस्त होने के कारण पहाड़ी का एक हिस्सा दरक गया, जिससे भारी मात्रा में मलबा और विशाल बोल्डर सड़क पर आ गिरे। इसके चलते मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। घटना की सूचना मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने करीब एक घंटे बाद मार्ग खोलने के लिए जेसीबी मशीन मौके पर भेजी। हालांकि सड़क पर गिरे बड़े-बड़े बोल्डरों और भारी मलबे को हटाने का कार्य शुरू ही हुआ था कि कुछ देर बाद जेसीबी मशीन तकनीकी खराबी का शिकार हो गई। इससे राहत कार्य और अधिक धीमा पड़ गया, जिससे मौके पर मौजूद वाहन चालकों और यात्रियों में नाराजगी फैल गई।

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि आपदा के दौरान इतने महत्वपूर्ण मार्ग को खोलने के लिए केवल एक मशीन क्यों लगाई गई। लोगों का कहना था कि यदि अतिरिक्त मशीनें पहले से उपलब्ध होतीं तो सड़क को जल्द खोला जा सकता था और यात्रियों को घंटों तक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। मार्ग बंद होने के कारण दिल्ली, हल्द्वानी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला, बेरीनाग और पिथौरागढ़ की ओर जाने वाली रोडवेज और निजी बसों के साथ-साथ सैकड़ों टैक्सी वाहन बीच रास्ते में फंस गए। गर्मी और उमस के बीच बसों और टैक्सियों में बैठे यात्री करीब पांच घंटे तक भूखे-प्यासे सड़क खुलने का इंतजार करते रहे। इस दौरान एक शव यात्रा लेकर थल जा रहा वाहन भी जाम में फंस गया, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

व्यापार संघ अध्यक्ष बबलू सामंत और सामाजिक कार्यकर्ता मुन्ना जंगपागी ने बताया कि सड़क बंद होते ही संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन को सूचना दे दी गई थी। इसके बावजूद राहत कार्य के लिए केवल एक जेसीबी मशीन भेजी गई, जिससे सड़क खोलने का काम बेहद धीमी गति से चलता रहा। उन्होंने कहा कि बरसात और आपदा के मौसम को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त जेसीबी मशीनें और आवश्यक संसाधन पहले से तैनात किए जाने चाहिए, ताकि ऐसी परिस्थितियों में लोगों को घंटों तक परेशान न होना पड़े। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले सप्ताह थल में आयोजित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों ने माइक्रोहाइडल परियोजना की क्षतिग्रस्त नहर को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों को पहले ही चेतावनी दी थी। लोगों ने आशंका जताई थी कि यदि समय रहते नहर की मरम्मत नहीं की गई तो पहाड़ी दरक सकती है और सड़क बंद होने जैसी बड़ी घटना हो सकती है। लेकिन शिकायतों के बावजूद विभागों ने समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की, जिसका परिणाम अब लोगों को भुगतना पड़ा।

खबर लिखे जाने तक सड़क पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी थी और राहत कार्य जारी था। वहीं जिले में पिछले दिनों हुई लगातार बारिश के कारण पहले से ही 15 सड़कें बंद चल रही हैं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित बना हुआ है। तहसीलदार बेरीनाग दयाल चंद्र मिश्रा ने बताया कि सड़क बंद होने की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग को तत्काल जेसीबी मशीन भेजने के निर्देश दे दिए गए थे। उन्होंने कहा कि सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर आने के कारण मार्ग खोलने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि जल्द से जल्द सड़क को यातायात के लिए सुचारु कर दिया जाए।




