उत्तराखण्ड

हरीश रावत बोले भाजपा और आप पार्टी को मेरी ट्वीट को पढ़कर लगी मिर्ची, सूत्रों की मानें तो हरीश रावत होंगे मुख्यमंत्री का चेहरा

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष हरीश रावत को सुर्खियों में बने रहने का गुर बखूबी आता है। हरीश रावत अपने बयानों के चलते लगभग रोज ही समाचारों की सुर्खियों में रहते हैं। हरीश रावत न केवल कांग्रेस के वरिष्ठतम सिपाही हैं बल्कि वे राजनीतिक कौशल के भी अच्छे जानकार और मंझे हुए खिलाड़ियों में शुमार हैं आयु के इस पड़ाव में उनमें युवाओं से ज्यादा ऊर्जा दिखती है। उत्तराखंड भर का भ्रमण करते हैं लोगों को संगठित करते हैं भीषण कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद भी वे उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी गंगा के पक्ष में सल्ट जाते हैं। और अपने विरोधियों पर जमकर तंज भी करते हैं। इस हफ्ते
पहले हरीश रावत का बयान आया कि आप पार्टी उत्तराखंड में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए खड़ी है।

 

उसके बाद हरीश रावत का बयान आया कि संगठन में कुछ लोग उनका सहयोग नहीं कर रहे हैं। उसके बाद फिर रावत का बयान आया कि लगता है अब मुक्त होने का समय आ गया।

उत्तराखंड क्रांति दल के नेताओं से हरीश रावत की भेंट भी हलचल पैदा कर गयी। इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने हरीश रावत की नाराजगी का संज्ञान लेते हुए कांग्रेस जनों को दिल्ली तलब किया उसके बाद आज हरीश रावत कुछ ढीले पड़े और उन्होंने और उन्होंनें मीडिया पर ही सवाल उठा दिये कि मेरे बयानों को तोड़ मरोड़ कर अपने हिसाब से प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि मैं रूटीन ट्वीट कर रहा हूं और ये दिल से निकला ट्वीट है। हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर नया धमाका करते हुए लिखा कि “मेरा ट्वीट रोजमर्रा जैसा ही ट्वीट है, मगर आज अखबार पढ़ने के बाद लगा कि कुछ खास है, क्योंकि भाजपा और आप पार्टी को मेरी ट्वीट को पढ़कर बड़ी मिर्ची लग गई है और इसलिये बड़े नमक-मिर्च लगाये हुये बयान दे रहे हैं” अपने बेधड़क बयानों के कारण हरीश रावत कभी कभार ट्रोल भी होते रहे हैं लेकिन वह बिना किसी प्रवाह के बेधड़क और बेबाक प्रतिक्रिया के लिए जाने जाते हैं। पार्टी में कई लोग हरीश रावत को सलाह भी देते हैं कि कुछ बातें केवल पार्टी फोरम पर ही उठाई जाए लेकिन हरीश रावत डेढ़ वर्ष पहले से कह रहे हैं कि उत्तराखंड में “कांग्रेस आलाकमान को पार्टी का मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर देना चाहिए” समझा जा रहा है कि पार्टी द्वारा डेढ़ साल में भी हरीश रावत की बात पर गौर नहीं किया गया इसी कारण हरीश रावत आहत होकर कार्यमुक्त होने का संकेत भी दे रहे हैं

लेकिन पार्टी में हरीश रावत के समर्थकों की एक जबरदस्त फौज है इसलिए पार्टी आलाकमान भी हरीश रावत के कद को अनदेखा नहीं कर सकता शायद इसीलिए पार्टी के नेताओं को दिल्ली तलब भी किया गया अब देखने वाली बात यह होगी कि आगे पार्टी आलाकमान उत्तराखंड की कमान किसे देता है। सूत्रों की मानें तो हरीश रावत जब मुख्यमंत्री थे तब उनकी पार्टी के ९ विधायक भाजपा में शामिल हुए और मुख्यमंत्री रहते वे खुद दो जगह से चुनाव हारे उनके पंजाब प्रभारी रहते पंजाब में भी खासी उट्ठापटक हुई कैप्टन अमरिंदर सिंह की कुर्सी चले गयी यही वह गांठ है जिस कारण आला कमान उन्हें पार्टी का मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने में हिचक रहा है। फिर भी प्रीतम सिंह, हरीश रावत और गणेश गोदियाल की तिकड़ी ने उत्तराखंड कांग्रेस में जान फूंकी है इसका प्रमाण राहुल गांधी की कुछ दिनों पहले देहरादून की परेडग्राउंड रैली में उमड़ी भीड़ को समझा जा रहा है। लेकिन जिस तरह कांग्रेस आलाकमान ने मध्य प्रदेश में कमलनाथ व राजस्थान में अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया सूत्रों की मानें तो उत्तराखंड में भी कांग्रेस आलाकमान हरीश रावत को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया जा सकता है। जबकि मुकुल वासनिक को उत्तराखंड चुनाव प्रभारी बनाये जाने के संकेत भी मिल रहे हैं। 

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