उत्तराखंड कांग्रेस ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। पार्टी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार टिकट वितरण में किसी भी प्रकार की सिफारिश, गुटबाजी या व्यक्तिगत पसंद-नापसंद को महत्व नहीं दिया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि टिकट उसी नेता को मिलेगा जो पार्टी द्वारा तय किए गए तीन बड़े इम्तिहानों में सफल साबित होगा। इस फैसले के बाद लंबे समय से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं में हलचल तेज हो गई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि पार्टी अब केवल जीतने वाले और जनता के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले चेहरों पर दांव लगाएगी। कांग्रेस का मानना है कि पिछले कई चुनावों में टिकट वितरण को लेकर हुई गलतियों का नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा है। इसलिए 2027 चुनाव में प्रत्याशी चयन पूरी तरह सर्वे, संगठनात्मक रिपोर्ट और जनता के फीडबैक के आधार पर किया जाएगा।
दरअसल कांग्रेस लगातार दो विधानसभा चुनाव हार चुकी है और पिछले करीब दस सालों से सत्ता से बाहर है। ऐसे में पार्टी इस बार किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहती। दूसरी ओर भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के मिशन में जुटी हुई है और प्रत्याशियों को लेकर कई चरणों में सर्वे करा चुकी है। अब कांग्रेस भी उसी रणनीति पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी संभावित उम्मीदवारों का तीन स्तर पर आकलन करेगी। इसमें पहला संगठन में सक्रियता और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़, दूसरा जनता के बीच लोकप्रियता और तीसरा जीतने की क्षमता का सर्वे शामिल होगा। इसके अलावा उम्मीदवार की छवि, विवादों से दूरी और क्षेत्र में सक्रियता भी अहम मापदंड होंगे।
कांग्रेस के इस फैसले से साफ है कि अब केवल बड़े नेताओं की पैरवी या हाईकमान तक पहुंच रखने भर से टिकट मिलना आसान नहीं होगा। पार्टी उन चेहरों को प्राथमिकता देना चाहती है जो जमीन पर लगातार सक्रिय हैं और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस का यह नया फॉर्मूला पार्टी संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ चुनावी रणनीति को भी नई दिशा दे सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस की यह नई रणनीति 2027 विधानसभा चुनाव में कितना असर दिखा पाती है और क्या पार्टी इस बदलाव के दम पर सत्ता में वापसी कर पाएगी या नहीं।