उत्तर प्रदेश

जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत! 38 भवनों पर बुलडोजर कार्रवाई फिलहाल रुकी, हाईकोर्ट से याचिका वापस

प्रयागराज/रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने के मामले में विश्वविद्यालय ट्रस्ट को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका को ट्रस्ट ने स्वयं वापस ले लिया है। ट्रस्ट ने अदालत को बताया कि इसी विवाद में मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट से पहले ही अंतरिम स्थगन आदेश (स्टे) मिल चुका है। ऐसे में हाईकोर्ट में याचिका जारी रखने की आवश्यकता नहीं रह गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह शामिल थे, ने ट्रस्ट की मांग स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

38 भवनों को गिराने के आदेश को दी गई थी चुनौती

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका में रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के 15 जुलाई 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया था कि ध्वस्तीकरण आदेश को रद्द किया जाए और अंतिम निर्णय आने तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

ट्रस्ट ने छात्रों और कर्मचारियों का दिया हवाला

याचिका में कहा गया था कि विश्वविद्यालय में वर्तमान समय में 1,205 छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि 162 कर्मचारी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। ट्रस्ट का तर्क था कि यदि भवनों को गिरा दिया गया तो छात्रों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित होगी और शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों की आजीविका पर भी सीधा असर पड़ेगा। इसलिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोकना आवश्यक है।

इन विभागों को बनाया गया था पक्षकार

इस मामले में राज्य सरकार के अलावा मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर, रामपुर विकास प्राधिकरण, जिला पंचायत रामपुर के अपर मुख्य अधिकारी और क्षेत्र पंचायत सैदनगर को प्रतिवादी बनाया गया था। हालांकि, कमिश्नर कोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद ट्रस्ट ने हाईकोर्ट में लंबित याचिका वापस लेने का निर्णय लिया।

कमिश्नर कोर्ट ने पहले ही लगा दी थी अंतरिम रोक

गौरतलब है कि 27 जुलाई 2026 को मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट ने रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। बताया गया कि रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय की कई इमारतों को बिना स्वीकृत मानचित्र (मैप) के निर्मित बताते हुए उनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। इस आदेश के खिलाफ ट्रस्ट ने अपील दायर की थी, जिस पर कमिश्नर कोर्ट ने फिलहाल स्टे देते हुए राहत प्रदान की।

आगे क्या होगा?

फिलहाल कमिश्नर कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश के चलते विश्वविद्यालय की 38 इमारतों पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई रुकी हुई है। अब इस मामले में अंतिम फैसला अपीलीय प्राधिकारी की सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा। जब तक अंतरिम राहत प्रभावी रहेगी, तब तक विश्वविद्यालय परिसर में किसी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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