देहरादून बाल तस्करी मामले में बड़ा फैसला, चार दोषियों को 10-10 साल की कठोर कैद

देहरादून:- थाना कैंट क्षेत्र के यमुना कॉलोनी से दो नाबालिग भाइयों को उनकी मां की जानकारी के बिना ले जाने और दो वर्षीय बच्चे को कथित तौर पर 2 लाख रुपये में दूसरे परिवार को सौंपने के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रियंका, तान्या, सैंटी और राकेश को दोषी करार देते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, आरोपी राहुल को अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर पाने के चलते बरी कर दिया गया। अदालत ने चारों दोषियों को धारा 137(2) के तहत 3-3 साल के कठोर कारावास और 2-2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 143(4) के तहत 10-10 साल का कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी, इसलिए प्रभावी सजा 10 साल की कठोर कैद होगी।
16 दिसंबर 2024 को घर से ले जाए गए थे दोनों बच्चे
यह मामला 16 दिसंबर 2024 का है। यमुना कॉलोनी निवासी रीना के 5 वर्षीय बेटे आकाश और 2 वर्षीय विकास को राकेश नाम का व्यक्ति कथित तौर पर उनकी मां की जानकारी और सहमति के बिना घर से अपने साथ ले गया था। बच्चों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। बच्चों के गायब होने की शिकायत मिलने के बाद थाना कैंट पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि 2 वर्षीय विकास धामपुर में प्रियंका और सैंटी के पास पहुंचा था। बाद में बच्चे को बिजनौर के सरकथल शिवाला कला निवासी राजवती के घर से बरामद किया गया।
मोबाइल नंबरों की जांच से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
बच्चों की तलाश के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल नंबर और उनके संपर्कों की जांच की। इसी दौरान राकेश और राहुल के बीच लगातार संपर्क होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश के कटाई-मुरादाबाद क्षेत्र में दबिश देकर राकेश और तान्या को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने बताया कि बच्चा धामपुर में प्रियंका और सैंटी के पास है। पुलिस दोनों को लेकर धामपुर पहुंची। पूछताछ में प्रियंका और सैंटी ने बच्चे के बिजनौर में अपनी परिचित राजवती के पास होने की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, बच्चे को सौंपने के बदले उन्हें 2 लाख रुपये मिले थे।
13 जनवरी 2025 को मां को सौंपा गया विकास
बिजनौर से बरामद किए गए 2 वर्षीय विकास की पहचान उसकी मां रीना और मामा सतीश ने की। इसके बाद 13 जनवरी 2025 को बच्चे को उसकी मां और मामा की सुपुर्दगी में दे दिया गया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने राकेश, तान्या, प्रियंका और सैंटी को गिरफ्तार किया, जबकि राहुल फरार था। पुलिस ने मामले में मानव तस्करी से संबंधित धाराएं भी जोड़ीं और आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। बाद में 27 मार्च 2025 को राहुल को भी यमुना कॉलोनी के पास से गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ 22 मई 2025 को अलग से आरोप पत्र दाखिल किया गया।
अलग-अलग तारीखों पर आरोपियों को मिली थी जमानत
मामले में गिरफ्तार आरोपियों को अलग-अलग तारीखों पर जमानत मिली थी। प्रियंका को 30 मई 2025, तान्या को 26 जून 2025 और राकेश को 28 जून 2025 को जमानत मिली थी। वहीं सैंटी को गिरफ्तारी के दिन ही जमानत मिल गई थी।
10 अगस्त को दोषी, 12 अगस्त को सुनाई गई सजा
अदालत ने 16 दिसंबर 2024 की घटना से जुड़े मामले में 10 अगस्त 2026 को प्रियंका, तान्या, सैंटी और राकेश को दोषी करार दिया था। इसके दो दिन बाद 12 अगस्त 2026 को कोर्ट ने चारों को सजा सुनाई। अदालत ने माना कि 2 वर्षीय विकास को उसकी मां की वैध संरक्षकता से हटाकर दूसरे परिवार को सौंपे जाने से जुड़े आरोप पर्याप्त साक्ष्यों से साबित हुए हैं। हालांकि, कोर्ट ने सभी आरोपियों को मामले के प्रत्येक आरोप में दोषी नहीं माना।
5 वर्षीय आकाश मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव गुप्ता के मुताबिक, जांच में यह सामने आया कि 5 वर्षीय आकाश को भी राकेश अपने साथ लेकर गया था। हालांकि, आकाश की मानव तस्करी में अन्य आरोपियों की भूमिका साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य अदालत के सामने नहीं रखे जा सके। वहीं, राहुल के खिलाफ भी अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे धारा 137(2) और 143(4) के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत के फैसले के बाद प्रियंका, तान्या, सैंटी और राकेश को 10-10 साल की कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी।




