उत्तराखंड के 11,267 आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों पर शासन सक्रिय, उच्चस्तरीय बैठक की तैयारी – Parvat Sankalp News

उत्तराखंड के 11,267 आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों पर शासन सक्रिय, उच्चस्तरीय बैठक की तैयारी

उत्तराखंड में आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों की मांगों को लेकर शासन स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ती नजर आ रही है। संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ की ओर से उठाए गए मुद्दों और प्रस्तुत आंकड़ों के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय के स्तर से मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया है। कर्मचारियों की समस्याओं के नीतिगत और स्थायी समाधान के लिए उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इस घटनाक्रम से प्रदेशभर के हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों में उम्मीद जगी है।

अक्टूबर में परेड ग्राउंड में किया था आंदोलन

संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ के बैनर तले प्रदेशभर के कर्मचारियों ने 6 और 7 अक्टूबर 2026 को देहरादून के परेड ग्राउंड में धरना-प्रदर्शन किया था। आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी सेवा सुरक्षा, वेतन और नियमितीकरण से जुड़ी मांगें उठाई थीं। आंदोलन के बाद शासन स्तर से मिले निर्देशों के क्रम में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई। इस दौरान कर्मचारियों के भविष्य और सेवा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण की मांग

वार्ता के दौरान संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने मुख्य रूप से दो प्रमुख मांगें शासन के सामने रखीं।

1. समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण: संगठन ने मांग की कि आउटसोर्स कर्मचारियों को उपनल (UPNL) कर्मचारियों की तर्ज पर समान कार्य-समान वेतन, नियमितीकरण और समान सेवा नियमावली का लाभ दिया जाए।

2. सेवा समाप्ति पर रोक और कर्मचारियों की बहाली: संगठन का कहना है कि किसी भी आउटसोर्स कर्मचारी की सेवा बिना उचित कारण और निर्धारित अनुशासनात्मक प्रक्रिया के अचानक समाप्त नहीं की जानी चाहिए। इसके साथ ही पूर्व में सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को दोबारा बहाल करने की मांग भी उठाई गई।

प्रदेश में 11,267 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत

वार्ता के दौरान संगठन को प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों और सेवा से हटाए गए कर्मियों का आंकड़ा जुटाकर प्रस्तुत करने के लिए एक महीने का समय दिया गया था। इसके बाद संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शासन के समक्ष दोबारा पक्ष रखते हुए आंकड़े प्रस्तुत किए।

संगठन की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार:

  • प्रदेश के विभिन्न विभागों में करीब 11,267 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं।
  • अब तक लगभग 309 कर्मचारियों को विभिन्न कारणों से सेवा से हटाया जा चुका है।
  • संगठन ने भविष्य में किसी भी कर्मचारी की सेवा बिना उचित कारण के अचानक समाप्त न करने की मांग की है।

मुख्य सचिव को भेजा गया पत्र, उच्चस्तरीय बैठक की तैयारी

संगठन की ओर से प्रस्तुत मांगों और आंकड़ों के बाद शासन स्तर पर भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। जानकारी के अनुसार, सचिव, मुख्यमंत्री उत्तराखंड शासन विनय शंकर पाण्डेय ने मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। पत्र में संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ की मांगों और उनसे जुड़े प्रकरणों के नीतिगत एवं स्थायी समाधान के लिए उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसके लिए शासन स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, समान कार्य-समान वेतन, नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा जैसी मांगों पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है। ऐसे में प्रदेश के हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों की निगाहें प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक और शासन के अगले फैसले पर टिकी हैं।

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