देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘जन्नासरी’ के स्थान पर ‘जौनसारी’ शब्द संशोधित कराने के लिए केंद्र सरकार को संस्तुति भेजने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद आरटीआई एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता विकेश नेगी ने मुख्यमंत्री और देहरादून जिला प्रशासन से जौनसार क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर मांग उठाई है। विकेश नेगी ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लेती, तब तक जौनसार क्षेत्र में नए ST प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगाने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के फैसलों के कारण कई अपात्र लोगों ने अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ लिया, जबकि उनके अनुसार कोल्टा और बाजगी समुदाय के पात्र लोग अब भी अपेक्षित लाभ से वंचित हैं।
ST प्रमाणपत्रों की वैधता पर उठाए सवाल
अधिवक्ता विकेश नेगी का दावा है कि कैबिनेट के ताजा फैसले से जौनसार क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर पुनर्विचार की जरूरत सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के कुछ ब्राह्मण, खस और क्षत्रिय समुदायों के लोग ST आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, जबकि कोल्टा और बाजगी समुदाय के लोगों को उनका उचित अधिकार नहीं मिल पा रहा है। नेगी ने जिला प्रशासन से जौनसार क्षेत्र में जारी ST प्रमाणपत्रों की समीक्षा करने और उनके अनुसार अपात्र पाए जाने वाले लोगों के प्रमाणपत्र निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने 28 नवंबर 2000 के बाद जारी प्रमाणपत्रों की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, प्रमाणपत्रों को अवैध घोषित किए जाने या निरस्त किए जाने के संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रावधानों, सरकारी रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगी।
राष्ट्रपति के आदेश और समिति की रिपोर्ट का दिया हवाला
विकेश नेगी ने अपने पक्ष में वर्ष 1967 के राष्ट्रपति के आदेश और लोकुर-डेबुर समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया। उनका कहना है कि जौनसार में अनुसूचित जनजाति आरक्षण के लिए समुदाय आधारित पात्रता को ध्यान में रखा जाना चाहिए और सभी क्षेत्रवासियों को एक समान आधार पर पात्र नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को वह लगातार सरकार के सामने उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है और अदालत ने सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।
केंद्र के फैसले तक नए प्रमाणपत्र जारी न करने की मांग
अधिवक्ता नेगी का कहना है कि अनुसूचित जनजाति सूची में संशोधन का विषय संसद की प्रक्रिया से जुड़ा है। इसलिए केंद्र सरकार के निर्णय तक राज्य सरकार को जौनसार क्षेत्र में नए ST प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह इस मामले में अदालत का रुख कर सकते हैं। फिलहाल, कैबिनेट की संस्तुति के बाद केंद्र सरकार का निर्णय और संबंधित कानूनी प्रक्रिया इस विवाद में अहम मानी जा रही है।