सहसपुर में कांग्रेस की न्याय यात्रा के दौरान हंगामा, हरक सिंह रावत और आर्येंद्र शर्मा के समर्थक आमने-सामने – Parvat Sankalp News

सहसपुर में कांग्रेस की न्याय यात्रा के दौरान हंगामा, हरक सिंह रावत और आर्येंद्र शर्मा के समर्थक आमने-सामने

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी बीच सहसपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की न्याय यात्रा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब पार्टी नेता हरक सिंह रावत और आर्येंद्र शर्मा के समर्थक एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। स्थिति को संभालने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने समर्थकों से शांत रहने और व्यक्तिगत नारेबाजी से बचने की हिदायत दी।

सहसपुर सीट पर दावेदारी को लेकर बढ़ी चर्चा

सहसपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के भीतर आगामी चुनाव को लेकर दावेदारी का मुद्दा लगातार चर्चा में है। हरक सिंह रावत और आर्येंद्र शर्मा दोनों ही क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए हुए हैं। न्याय यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच हुई नारेबाजी ने इस राजनीतिक खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इस घटनाक्रम से पार्टी के भीतर किसी औपचारिक निर्णय या अंतिम प्रत्याशी चयन की पुष्टि नहीं होती है। आगामी विधानसभा चुनाव में सहसपुर से किसे उम्मीदवार बनाया जाएगा, इसका फैसला पार्टी हाईकमान को करना है।

हरक सिंह रावत कई बार जता चुके हैं चुनाव लड़ने की इच्छा

हरक सिंह रावत अपने बयानों में सहसपुर विधानसभा सीट से आगामी चुनाव लड़ने की इच्छा कई बार जाहिर कर चुके हैं। उनकी क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता के बीच आर्येंद्र शर्मा की दावेदारी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। बताया जा रहा है कि हरक सिंह रावत की सहसपुर में सक्रियता बढ़ने के बाद आर्येंद्र शर्मा ने पार्टी हाईकमान से मुलाकात की थी। हालांकि, इस मुलाकात के एजेंडे और उसके परिणामों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

प्रीतम सिंह ने समर्थकों को कराया शांत

न्याय यात्रा के दौरान समर्थकों के बीच नारेबाजी बढ़ने पर प्रीतम सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को शांत कराते हुए व्यक्तिगत नारेबाजी नहीं करने की हिदायत दी। पार्टी के कार्यक्रमों में अनुशासन बनाए रखने और आपसी मतभेदों को नियंत्रित रखने की जरूरत के बीच उनका हस्तक्षेप महत्वपूर्ण रहा। सहसपुर में हुए इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के भीतर चुनावी दावेदारी और नेताओं के समर्थकों के बीच तालमेल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी नेतृत्व सहसपुर सीट को लेकर आगे क्या रणनीति अपनाता है और चुनाव से पहले संगठन के भीतर समन्वय कैसे बनाए रखा जाता है।

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