नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में तेजी से बढ़ रही पर्यटन और निर्माण गतिविधियों के बीच पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) ने सख्ती शुरू कर दी है। कैंची धाम और भवाली समेत जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में किए गए संयुक्त सर्वे के दौरान होटल, रेस्टोरेंट और निर्माणाधीन फ्लैट्स में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) तथा अन्य पर्यावरणीय व्यवस्थाओं से जुड़ी कमियां सामने आई हैं। सर्वे के आधार पर PCB ने कुल 12 होटल, रेस्टोरेंट और फ्लैट संचालकों को नोटिस जारी किया है। संबंधित संचालकों को निर्धारित समय के भीतर जवाब देने और पर्यावरणीय व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।
कैंची धाम-भवाली में होटल संचालकों पर कार्रवाई
कैंची धाम उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के साथ होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार भी हुआ है। ऐसे में इन प्रतिष्ठानों से निकलने वाले सीवेज और गंदे पानी के उचित उपचार एवं निस्तारण की व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए PCB की टीम ने संबंधित विभागों के साथ मिलकर क्षेत्र का सर्वे किया। सर्वे के दौरान कैंची धाम और भवाली क्षेत्र के तीन होटलों में STP की व्यवस्था नहीं मिली। कुछ अन्य प्रतिष्ठानों में STP स्थापित होने के बावजूद उनके संचालन से संबंधित कमियां भी सामने आने की बात कही गई है।
कुछ प्रतिष्ठानों के पास जरूरी अनुमति भी नहीं
जांच के दौरान केवल STP से संबंधित कमियां ही नहीं, बल्कि कुछ संचालकों के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित आवश्यक अनुमति या लाइसेंस नहीं होने की बात भी सामने आई। पर्यावरणीय नियमों के तहत व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए सीवेज प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित आवश्यक अनुपालन महत्वपूर्ण होता है। PCB ने संबंधित संचालकों को नोटिस जारी करते हुए निर्धारित समय में जवाब देने और कमियों को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
श्यामखेत में छह निर्माणाधीन फ्लैट भी जांच के घेरे में
संयुक्त सर्वे के दौरान भवाली के श्यामखेत क्षेत्र में निर्माणाधीन छह फ्लैट्स भी जांच के दायरे में आए। इन निर्माणाधीन परियोजनाओं में पर्यावरणीय मानकों से जुड़ी कमियां पाए जाने की बात सामने आई है। PCB ने इन मामलों में भी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। विभाग की ओर से अब यह देखा जाएगा कि नोटिस का जवाब क्या दिया जाता है और संबंधित परियोजनाओं में पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
रामनगर के तीन होटलों में भी STP नहीं मिला
PCB की कार्रवाई केवल कैंची धाम और भवाली तक सीमित नहीं रही। सर्वे के दौरान रामनगर क्षेत्र के तीन होटलों में भी STP की व्यवस्था नहीं मिलने की बात सामने आई है। इन प्रतिष्ठानों को भी नोटिस जारी किया गया है। इस तरह कैंची धाम-भवाली, श्यामखेत और रामनगर समेत जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 12 प्रतिष्ठान PCB की कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
तय समय में सुधार नहीं तो मुकदमा और सीलिंग की चेतावनी
PCB के क्षेत्रीय प्रबंधक अनुराग नेगी के अनुसार, नोटिस प्राप्त करने वाले सभी संबंधित प्रतिष्ठानों को निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष रखने और जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि तय अवधि में पर्यावरणीय कमियों को दूर नहीं किया गया तो संबंधित संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ प्रतिष्ठानों को सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।इस कार्रवाई से साफ है कि PCB फिलहाल केवल नोटिस तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि नियमों का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा गया है।
बढ़ते पर्यटन के साथ सीवेज प्रबंधन बड़ी चुनौती
कैंची धाम में पिछले कुछ समय से पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों में तेजी आई है। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी दबाव बढ़ता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ पानी की खपत और सीवेज की मात्रा में भी वृद्धि होती है। ऐसे में यदि सीवेज का उपचार किए बिना उसका निस्तारण किया जाए तो इसका स्थानीय जलस्रोतों और पर्यावरण पर प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि पर्यटन क्षेत्रों में केवल सड़क, पार्किंग और भवन जैसी सुविधाओं का विस्तार ही नहीं, बल्कि सीवेज ट्रीटमेंट, ठोस कचरा प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
आगे की कार्रवाई नोटिस के जवाब पर निर्भर
PCB की ओर से जारी नोटिस के बाद अब संबंधित होटल, रेस्टोरेंट और निर्माणाधीन परियोजनाओं के संचालकों को अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद विभागीय स्तर पर यह तय किया जाएगा कि कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। यदि विभागीय जांच में नियमों का उल्लंघन कायम पाया जाता है और निर्धारित समय में सुधार नहीं होता, तो PCB की ओर से बताई गई कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।