देहरादून: विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि 24 से 26 अक्टूबर 2026 तक ‘आदि कैलाश परिक्रमा 2.0’ का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य आदि कैलाश और ॐ पर्वत क्षेत्र की प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक विशेषताओं को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाना है। पर्यटन मंत्री के मुताबिक उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने वाले ऐसे आयोजन उत्तराखंड के सीमांत इलाकों को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर भी बढ़ा सकते हैं।
आदि कैलाश और ॐ पर्वत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी
सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन तेजी से विस्तार ले रहा है। आदि कैलाश क्षेत्र में प्रस्तावित परिक्रमा आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने ‘आदि कैलाश परिक्रमा रन’ और ‘नीति वैली अल्ट्रा’ जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्च हिमालयी और सीमांत क्षेत्रों में आयोजित की जा रही साहसिक गतिविधियों से इन इलाकों की पहचान व्यापक स्तर पर बन रही है। इन आयोजनों का लाभ केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर होम स्टे, परिवहन, गाइड, भोजन और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को भी आर्थिक अवसर मिल रहे हैं।
नवंबर में होगी हिमालयन कार रैली
साहसिक पर्यटन को आगे बढ़ाने की कड़ी में नवंबर 2026 में हिमालयन कार रैली का आयोजन भी प्रस्तावित है। सरकार का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में पर्यटन की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। इन आयोजनों के जरिए राज्य में केवल पारंपरिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि एडवेंचर और एक्सपीरियंस आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
GPS और GIS से मैप होंगे 100 ट्रेकिंग रूट
पर्यटन मंत्री ने बताया कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के जरिए उत्तराखंड के ट्रेकिंग क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। राज्य के 100 प्रमुख ट्रेकिंग रूटों की GPS और GIS तकनीक से मैपिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें 50 ट्रेकिंग रूट गढ़वाल और 50 कुमाऊं क्षेत्र के शामिल हैं। इसके लिए संबंधित टीमों को रवाना किया जा चुका है। मैपिंग पूरी होने के बाद ट्रेकर्स के लिए एक मोबाइल नेविगेशन ऐप विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही ‘द ट्रेक्स ऑफ उत्तराखंड’ नाम से कॉफी टेबल बुक भी तैयार की जाएगी। सरकार का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से ट्रेकिंग रूट की जानकारी को आसानी से उपलब्ध कराना और पर्यटकों की सुरक्षा बढ़ाना है। साथ ही इससे देश-विदेश के ट्रेकिंग प्रेमियों को उत्तराखंड के नए रूटों की जानकारी मिल सकेगी।
6 हजार से ज्यादा होम स्टे दे रहे रोजगार
उत्तराखंड में पर्यटन आधारित रोजगार को बढ़ाने में होम स्टे योजना की भी अहम भूमिका बताई गई है। राज्य में वर्तमान में 6,000 से अधिक पंजीकृत होम स्टे संचालित होने की जानकारी दी गई है। होम स्टे के माध्यम से स्थानीय परिवारों और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही आय का स्रोत उपलब्ध हो रहा है। सरकार का जोर पर्यटन को केवल कुछ प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित रखने के बजाय गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने पर है।
बारहमासी पर्यटन पर जोर
उत्तराखंड को सालभर पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाए रखने के लिए शीतकालीन चारधाम यात्रा, स्नो ट्रेकिंग, एस्ट्रो टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना पर काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य पर्यटन सीजन को कुछ महीनों तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग मौसमों में अलग तरह की पर्यटन गतिविधियों के जरिए पर्यटकों को राज्य से जोड़ना है। इसके अलावा नवंबर में एकता नगर के ‘भारत पर्व’ और लंदन में होने वाले वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट जैसे आयोजनों के जरिए उत्तराखंड की पर्यटन संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने की योजना है।
‘भारत की आध्यात्मिक राजधानी’ बनाने का रोडमैप
पर्यटन मंत्री ने उत्तराखंड को ‘भारत की आध्यात्मिक राजधानी’ के रूप में विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया। इसके तहत राज्य की धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत को अलग-अलग सर्किट के माध्यम से पर्यटन से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। इनमें शाक्त, शैव और वैष्णव परंपराओं के साथ स्वामी विवेकानंद, नरसिंह, गोल्ज्यू, गुरुद्वारा, नवग्रह, नागराजा, हनुमान और महासू देवता से जुड़े धार्मिक सर्किट शामिल हैं। सरकार का कहना है कि धार्मिक, आध्यात्मिक, साहसिक और प्रकृति आधारित पर्यटन को एक साथ विकसित करके उत्तराखंड को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में और मजबूत पहचान दिलाई जा सकती है।