उत्तरकाशी। भारत-चीन सीमा से सटे उत्तरकाशी के सीमांत गांव जादुंग में पर्यटन विकास की योजनाएं अब धीरे-धीरे धरातल पर आकार लेने लगी हैं। केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित जादुंग में पहले चरण के छह होमस्टे का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। अब इन्हें संबंधित भूमि स्वामी ग्रामीणों को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, होमस्टे तैयार होने के बावजूद स्थानीय ग्रामीणों के सामने एक बड़ी चुनौती इनर लाइन से जुड़े नियमों की है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्यटकों की आवाजाही और रात्रि प्रवास को लेकर मौजूदा पाबंदियों के कारण पर्यटन गतिविधियों को अपेक्षित गति मिलना मुश्किल हो सकता है।

1962 के बाद विस्थापित हुआ था जादुंग
जादुंग गांव का इतिहास भारत-चीन सीमा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यहां रहने वाले ग्रामीणों को विस्थापित किया गया था। लंबे समय बाद सीमांत गांवों को फिर से आबाद करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से यहां विकास और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में जादुंग में प्रथम चरण में छह होमस्टे तैयार किए गए हैं। इनके निर्माण कार्य का राजस्व विभाग और ग्राम पर्यटन समिति की ओर से निरीक्षण भी किया गया है। स्थानीय स्तर पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि वरिष्ठ अधिकारी जल्द जादुंग पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा ले सकते हैं और होमस्टे ग्रामीणों को सौंपने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है।

रात्रि प्रवास की अनुमति को लेकर ग्रामीणों की चिंता
ग्रामीणों के मुताबिक जादुंग और नेलांग क्षेत्र में इनर लाइन से जुड़े नियम अभी भी लागू हैं। इन नियमों के कारण पर्यटकों की आवाजाही और रात में ठहरने को लेकर विभिन्न प्रकार की अनुमति प्रक्रियाएं और पाबंदियां बनी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि होमस्टे में पर्यटकों के रात्रि प्रवास की व्यवस्था सहज नहीं हो पाती है, तो पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का उद्देश्य पूरी तरह हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा। इसके अलावा स्थानीय लोगों को पारंपरिक धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ के लिए भी अनुमति प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीण चाहते हैं कि सीमांत क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आवाजाही से जुड़े नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया जाए।

इनर लाइन नियमों में ढील की मांग
ग्राम पर्यटन समिति जादुंग के कोषाध्यक्ष भवान सिंह राणा का कहना है कि सीमांत क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आवाजाही के नियमों को आसान बनाने की जरूरत है।
“जादुंग और नेलांग जाने के लिए इनर लाइन की बाध्यताओं को कम किया जाना चाहिए। साथ ही दोपहिया वाहनों की आवाजाही को भी सुगम बनाने की जरूरत है। इससे स्थानीय ग्रामीण पर्यटन, कृषि और अन्य गतिविधियों से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर सकेंगे।”
— भवान सिंह राणा, कोषाध्यक्ष, ग्राम पर्यटन समिति जादुंग

होमस्टे से रोजगार की उम्मीद
छह होमस्टे के निर्माण से स्थानीय ग्रामीणों में रोजगार और स्वरोजगार को लेकर उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक भोजन, संस्कृति और हस्तशिल्प को भी बाजार मिल सकता है। विस्थापन के लंबे दौर के बाद पैतृक गांव के विकास की दिशा में हो रही पहल को ग्रामीण महत्वपूर्ण मान रहे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि पर्यटन ढांचे के साथ-साथ पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही से जुड़े नियमों में भी व्यावहारिक सुधार जरूरी है।

जल्द उपलब्ध होंगी जरूरी सुविधाएं
जिला पर्यटन अधिकारी कुशाल नेगी ने बताया कि जादुंग में तैयार किए गए छह होमस्टे में जल्द फर्नीचर सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
नियमों में बदलाव को लेकर सरकार स्तर पर काम
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्या ने बताया कि इनर लाइन से जुड़ी बाध्यताओं को कम करने के संबंध में केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर विभिन्न बिंदुओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास और पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। जादुंग में होमस्टे परियोजना को सीमांत क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब इसकी सफलता काफी हद तक पर्यटन गतिविधियों के संचालन, आवश्यक सुविधाओं और आवाजाही से जुड़े नियमों के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।