उत्तराखंड निकायों में बड़ा प्रशासनिक फैसला: क्लर्क और सफाई निरीक्षकों को मिली प्रभारी ईओ की जिम्मेदारी – Parvat Sankalp News

उत्तराखंड निकायों में बड़ा प्रशासनिक फैसला: क्लर्क और सफाई निरीक्षकों को मिली प्रभारी ईओ की जिम्मेदारी

देहरादून: उत्तराखंड के शहरी निकायों में अधिशासी अधिकारियों (Executive Officer) की कमी को दूर करने के लिए शहरी विकास निदेशालय ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। विभाग ने नियमित ईओ के रिक्त पदों पर कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए विभिन्न संवर्गों के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी (प्रभारी ईओ) की जिम्मेदारी सौंपी है। आदेश जारी होने के बाद यह फैसला प्रशासनिक और विभागीय हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

कई संवर्गों के कर्मचारियों को मिली अतिरिक्त जिम्मेदारी

जारी आदेशों के अनुसार विभिन्न नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में क्लर्क, कर निरीक्षक, सफाई निरीक्षक, टैक्स वसूली कर्मियों, लेखा संवर्ग के कर्मचारियों तथा अन्य अधिकारियों को प्रभारी ईओ के रूप में कार्यभार सौंपा गया है। इन अधिकारियों को नियमित अधिशासी अधिकारी की अनुपस्थिति में निकायों के प्रशासनिक कार्यों का संचालन करना होगा।

ईओ के कई पद लंबे समय से रिक्त

जानकारी के अनुसार शहरी विकास विभाग के पास वर्तमान में करीब 60 नियमित अधिशासी अधिकारी उपलब्ध हैं। इनमें से कई अधिकारियों की तैनाती नगर निगमों में होने के कारण नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में ईओ के कई पद खाली हो गए हैं। ऐसे में निकायों का दैनिक प्रशासन प्रभावित न हो, इसके लिए यह अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है। बताया जा रहा है कि यह आदेश अपर सचिव एवं निदेशक, शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी के नाम से जारी किए गए हैं।

नियुक्तियों को लेकर उठे सवाल

हालांकि इस फैसले के बाद विभागीय स्तर पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में सफाई निरीक्षक, कर निरीक्षक या लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारी सेवा के दौरान अधिशासी अधिकारी के पद तक पदोन्नत नहीं होते। ऐसे में उन्हें प्रभारी ईओ का दायित्व सौंपे जाने को लेकर नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया पर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड स्थानीय निकाय (केंद्रीकृत) सेवा नियमावली, 2019 के अनुसार अधिशासी अधिकारी के पद पर नियुक्ति या तो पदोन्नति के माध्यम से अथवा उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की चयन प्रक्रिया के जरिए की जाती है। यही कारण है कि इन आदेशों को लेकर विभागीय हलकों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

अभी तक विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं

सूत्रों के अनुसार यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है, ताकि नगर निकायों के विकास कार्य और जनसेवाएं प्रभावित न हों। हालांकि शहरी विकास विभाग की ओर से अभी तक इस निर्णय पर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें विभाग की अगली प्रतिक्रिया और संभावित स्पष्टीकरण पर टिकी हुई हैं।

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