कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला ने लिया VRS, उत्तराखंड वन विभाग में फिर उठे सवाल – Parvat Sankalp News

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला ने लिया VRS, उत्तराखंड वन विभाग में फिर उठे सवाल

उत्तराखंड के वन विभाग से एक बड़ी खबर सामने आई है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक और भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी साकेत बडोला ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने का निर्णय किया है। पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार निवासी साकेत बडोला ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने इसके पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है। साकेत बडोला के इस फैसले के बाद उत्तराखंड के प्रशासनिक और वन विभाग के गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य के कई वरिष्ठ वन अधिकारियों के समय से पहले सेवा छोड़ने या VRS के लिए आवेदन करने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर वरिष्ठ अधिकारी निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु से पहले सेवा छोड़ने का निर्णय क्यों ले रहे हैं।

साकेत बडोला ने निजी कारणों का दिया हवाला

अपने सोशल मीडिया संदेश में साकेत बडोला ने मां विंध्यवासिनी और बाबा नीलकंठ की पावन भूमि को नमन करते हुए बताया कि कई महीनों तक गंभीर विचार-विमर्श करने के बाद उन्होंने भारतीय वन सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का फैसला किया है। उन्होंने लिखा कि एक साधारण परिवार से आने वाले व्यक्ति के लिए अखिल भारतीय सेवा का हिस्सा बनना किसी सपने के सच होने जैसा था। अपने संदेश में उन्होंने प्रकृति संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और सेवा के दौरान मिले अनुभवों का भी उल्लेख किया। बडोला ने अपने कार्यकाल को संतोषजनक बताते हुए भविष्य में भी राष्ट्र निर्माण और जनसेवा में सक्रिय रहने की बात कही। हालांकि, उन्होंने अपनी भावी योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र के निदेशक पद पर रहते हुए उनके इस फैसले ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचा है। फिलहाल उनके संदेश में बताई गई निजी वजहों के अलावा किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं है।

धनंजय मोहन और मनोज चंद्रन के मामले भी चर्चा में

साकेत बडोला का मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड वन विभाग के उन वरिष्ठ अधिकारियों के फैसलों की भी चर्चा हो रही है, जिन्होंने निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु से पहले सेवा छोड़ने का निर्णय लिया था या इसके लिए आवेदन किया था। भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. धनंजय मोहन ने जून 2025 में प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष (HoFF) के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। उनके इस फैसले ने उस समय भी प्रशासनिक हलकों में चर्चा पैदा की थी। इसी तरह, आईएफएस अधिकारी मनोज चंद्रन ने अक्टूबर 2024 में पारिवारिक समस्याओं का हवाला देते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। उनके मामले में विभागीय पदोन्नति और नियमितीकरण से संबंधित आरोपों तथा जांच की चर्चा भी सामने आई थी। हालांकि, इन घटनाओं और साकेत बडोला के फैसले के बीच किसी साझा कारण का निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक साक्ष्य उपलब्ध होना जरूरी है।

क्या प्रशासनिक व्यवस्था भी बन रही है चर्चा का विषय?

वरिष्ठ अधिकारियों के समय से पहले सेवा छोड़ने के मामलों के बीच प्रशासनिक कार्यशैली, विभागीय परिस्थितियों और अधिकारियों के कामकाज से जुड़ी चुनौतियों पर सवाल उठ रहे हैं। वन विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अधिकारियों को वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष, वन भूमि प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इसके साथ ही नीतिगत फैसलों, विभागीय प्रक्रियाओं और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के बीच तालमेल भी आवश्यक होता है। हालांकि, किसी अधिकारी के VRS लेने के पीछे राजनीतिक दबाव, विभागीय असंतोष या अन्य कारण होने का दावा संबंधित साक्ष्यों या आधिकारिक जानकारी के बिना नहीं किया जा सकता। साकेत बडोला ने सार्वजनिक रूप से अपने फैसले की वजह निजी कारण बताई है।

वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है मामला

उत्तराखंड वन संपदा और वन्यजीव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है और यहां वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में रिजर्व के निदेशक का पद छोड़ने का फैसला प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आगे यह देखना होगा कि उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया कब पूरी होती है और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में नेतृत्व की जिम्मेदारी किस अधिकारी को सौंपी जाती है। साकेत बडोला के फैसले ने एक बार फिर उत्तराखंड में वरिष्ठ वन अधिकारियों की सेवा संबंधी निर्णयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, उनके अपने बयान के अनुसार इसकी वजह निजी है, इसलिए किसी अन्य संभावित कारण को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

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