उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR देश में पहली बार नहीं कराया जा रहा है, बल्कि इससे पहले भी कई बार मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण हो चुका है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा इसका विरोध किए जाने पर उन्होंने सवाल खड़े किए। सीएम धामी ने कहा कि अगर SIR के जरिए मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और शुद्ध बनाया जा रहा है तो इसका विरोध करने की वजह समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को आपत्ति इसलिए है क्योंकि इस प्रक्रिया के जरिए संदिग्ध और फर्जी मतदाताओं की पहचान करने के साथ-साथ अवैध घुसपैठ पर भी रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।
‘SIR पहली बार नहीं, पहले भी कई बार हो चुका है’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया कोई नई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने दावा किया कि SIR पहले भी करीब 20 बार किया जा चुका है और उस समय इस तरह का विरोध देखने को नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अवैध रूप से देश में आया है तो क्या उसे भारत में मतदान का अधिकार दिया जाना चाहिए? इसी तरह यदि किसी व्यक्ति के नाम अलग-अलग राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं और वह कई जगह वोटर बना हुआ है, तो ऐसी स्थिति को भी ठीक किया जाना जरूरी है। सीएम धामी ने कहा कि लोकतंत्र में मतदान का अधिकार वास्तविक और पात्र मतदाताओं को ही मिलना चाहिए। मतदाता सूची में गलत नाम, डुप्लीकेट प्रविष्टियां या अपात्र लोगों के नाम होने से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
कांग्रेस के पास मुद्दे नहीं, इसलिए SIR का विरोध- धामी
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर राजनीतिक मुद्दों की कमी का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कांग्रेस के पास जनता के बीच उठाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह SIR जैसी प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है। सीएम धामी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के संदर्भ में भी कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार वर्ष 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, लेकिन उससे पहले भी भारतीय जनता पार्टी और NDA लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया या संस्थाओं पर सवाल उठाने का कोई औचित्य नहीं है।उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची को व्यवस्थित करने और उसमें मौजूद कमियों को दूर करने का काम हो रहा है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक विरोध किया जाना चाहिए।
EVM को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना
सीएम धामी ने कांग्रेस द्वारा EVM को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कई बार चुनाव में हार के बाद EVM पर सवाल खड़े करती है, लेकिन जब उसी व्यवस्था के जरिए उसे जीत मिलती है तो उसके आरोप बदल जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का रवैया ‘विरोध के लिए विरोध’ करने वाला हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी EVM, कभी प्रशासन और कभी चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।
संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का लगाया आरोप
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कांग्रेस की ओर से लगातार संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी चुनाव आयोग, कभी प्रशासन और कभी न्यायपालिका को लेकर टिप्पणियां की जाती हैं। सीएम ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश संविधान और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार चलेगा, न कि किसी तरह की हुड़दंगबाजी या दबाव की राजनीति से।
‘SIR विरोध सिर्फ बहाना’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के SIR विरोध को लेकर कहा कि वास्तविक समस्या SIR नहीं बल्कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया है। उनका आरोप है कि जब चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और अपात्र मतदाताओं को हटाने की कोशिश की जा रही है, तो कांग्रेस को यह प्रक्रिया रास नहीं आ रही। सीएम धामी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का सही और अपडेट होना बेहद जरूरी है। पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में रहें और अपात्र या डुप्लीकेट नाम हटाए जाएं, यही निष्पक्ष चुनाव की बुनियादी जरूरत है।