उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धन्यवाद एवं जन संवाद यात्रा सोमवार रात हल्द्वानी पहुंची। कांग्रेस कार्यालय स्वराज आश्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान रावत ने कार्यकर्ताओं से संवाद किया और पार्टी हाईकमान की नाराजगी से जुड़े सवालों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। हरीश रावत ने कहा कि उनकी यह यात्रा किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं है। उन्होंने इसे उत्तराखंड की जनता और देवी-देवताओं के प्रति आभार जताने का माध्यम बताया। रावत के मुताबिक, प्रदेशवासियों ने उन्हें लंबे समय से जो स्नेह और सम्मान दिया है, उसके लिए वह अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों का धन्यवाद कर रहे हैं।
7 अक्टूबर को हाईकमान के सामने रखेंगे अपनी बात
धन्यवाद यात्रा को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की नाराजगी के सवाल पर हरीश रावत ने कहा कि पार्टी को उनसे स्पष्टीकरण मांगने का अधिकार है और वह अपनी बात नेतृत्व के सामने रखेंगे। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को शाम 7 बजे पार्टी महासचिव कुमारी सैलजा से मुलाकात प्रस्तावित है, जबकि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ भी उन्होंने इस विषय पर बातचीत की है। रावत के अनुसार, उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपनी यात्रा के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि आगे प्रस्तावित अपनी कई यात्राओं को वह पार्टी के समन्वित कार्यक्रम के लिए स्थगित करने को तैयार हैं। हालांकि, हल्द्वानी की यात्रा पहले से तय होने के कारण इसे रोकने से कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ने की बात उन्होंने कही।
‘कांग्रेस का कोई संगठित जनसंपर्क अभियान नहीं चल रहा’
हरीश रावत ने सवाल उठाया कि यदि उनकी धन्यवाद एवं जन संवाद यात्रा से कांग्रेस के कार्यक्रमों में कोई कमी आ रही है, तो इसकी वजह क्या है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जिलों, ब्लॉकों और ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस का कोई बड़ा संगठित जनसंपर्क अभियान उन्हें नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी यात्रा में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आम लोग शामिल हो रहे हैं। रावत ने कहा कि दूर-दराज के गांवों से बुजुर्ग और ऐसे लोग भी उनसे मिलने पहुंचे, जो लंबे समय से सक्रिय राजनीति या सामाजिक गतिविधियों से दूर हैं। उनके मुताबिक, इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है।
यात्रा में अव्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पर सवाल
रावत ने अपनी यात्रा के दौरान काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों में सामने आई व्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके काफिले को मुख्य मार्ग से जाने की अनुमति नहीं दी गई और रास्ते में चल रही कुछ गाड़ियों को कथित तौर पर दूसरी दिशा में भेज दिया गया, जिसके कारण काफिले को इंतजार करना पड़ा। रावत ने यह भी आरोप लगाया कि यात्रा के दौरान उन्हें अपेक्षित पुलिस एस्कॉर्ट उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका कहना था कि इससे यात्रा प्रभावित हुई और निर्धारित समय पर कार्यक्रमों में पहुंचने में परेशानी हुई। उन्होंने पुलिस व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों में नहीं होना चाहिए। रावत ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण सुनिश्चित करना है।
2027 को लेकर बोले- ‘बदलाव की सुगंध आ रही है’
हरीश रावत ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जन संवाद के दौरान उन्हें उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों की अपेक्षाओं और भावनाओं को समझने का अवसर मिल रहा है। उनके अनुसार, प्रदेश में बदलाव की मांग से जुड़े संकेत उन्हें लगातार मिल रहे हैं। हालांकि, रावत लगातार यह कहते रहे कि उनकी मौजूदा यात्रा को राजनीतिक अभियान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यात्रा का मूल उद्देश्य जनता के प्रति आभार व्यक्त करना और लोगों से सीधे संवाद करना है। हल्द्वानी में कार्यकर्ताओं के स्वागत और संवाद के बाद अब 7 अक्टूबर को कांग्रेस नेतृत्व के साथ होने वाली मुलाकात पर नजर रहेगी। इस मुलाकात में रावत अपनी यात्रा को लेकर पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखेंगे।