अल्मोड़ा: पहाड़ी जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावों के बीच अल्मोड़ा में हृदय रोगियों के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जिले में मेडिकल कॉलेज समेत कई सरकारी स्वास्थ्य संस्थान मौजूद हैं, लेकिन वर्तमान में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ यानी कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। इसके चलते हृदय संबंधी गंभीर मामलों में मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद हल्द्वानी या अन्य उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
हृदय रोगियों को फिजिशियन के भरोसे प्राथमिक उपचार
सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, ब्लड प्रेशर और अन्य हृदय संबंधी शिकायतों के साथ पहुंचते हैं। अस्पतालों में तैनात फिजिशियन मरीज की जांच करने के बाद आवश्यक प्राथमिक उपचार और जांच की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। हालांकि, जब मरीज की स्थिति गंभीर होती है या उसे विशेषज्ञ हृदय संबंधी उपचार की जरूरत होती है, तो उसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया जाता है। कार्डियोलॉजिस्ट की सीधी उपलब्धता नहीं होने से गंभीर मरीजों के उपचार में रेफरल व्यवस्था पर निर्भरता बढ़ जाती है।
हार्ट अटैक के मामलों में समय बेहद अहम
हृदयाघात यानी हार्ट अटैक के मामलों में शुरुआती समय को उपचार की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे मरीजों को जल्द से जल्द विशेषज्ञ चिकित्सा, आवश्यक जांच और उचित उपचार की जरूरत होती है। अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी जिले में समस्या इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि कई मरीजों को उपचार के लिए जिले से बाहर जाना पड़ता है। विशेषज्ञ चिकित्सक की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है।
100 से 200 किलोमीटर तक का सफर
अल्मोड़ा जिले के कई दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से हल्द्वानी की दूरी करीब 100 से 200 किलोमीटर तक है। पहाड़ी और संकरे रास्तों के कारण यह दूरी कई बार सामान्य मैदानी इलाकों की तुलना में काफी अधिक समय लेती है। गंभीर मरीजों को एंबुलेंस के जरिए हायर सेंटर पहुंचाते समय रास्ते में जाम, सड़क की खराब स्थिति और मौसम जैसी परिस्थितियां भी चुनौती बन सकती हैं। ऐसे मामलों में मरीज को लगातार ऑक्सीजन, निगरानी और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता की जरूरत होती है।
रेफरल के दौरान बढ़ जाता है जोखिम
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी मार्गों पर लंबा सफर गंभीर मरीजों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। कई बार एंबुलेंस को रास्ते में जाम का सामना करना पड़ता है, जिससे अस्पताल पहुंचने में देरी होती है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों के लिए यह देरी परेशानी बढ़ा सकती है। इसी वजह से लंबे समय से मांग उठती रही है कि अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज और जिले के प्रमुख अस्पतालों में हृदय रोग विशेषज्ञ की नियमित सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ परामर्श और आवश्यक उपचार मिल सके।
मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी सेवाओं की मांग
अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ की नियुक्ति की मांग स्थानीय स्तर पर लगातार उठती रही है। लोगों का कहना है कि यदि जिले में ही कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध हो तो हृदय रोगियों को प्रारंभिक विशेषज्ञ उपचार मिल सकेगा और गंभीर मामलों को ही आवश्यकता के अनुसार हायर सेंटर भेजना पड़ेगा। इससे दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी लंबी दूरी की परेशानी से राहत मिल सकती है।
क्या कहते हैं सीएमओ?
अल्मोड़ा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एचसी पंत के अनुसार, जिले के अस्पतालों में फिलहाल कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। उन्होंने बताया कि कार्डियोलॉजिस्ट का पद सुपर स्पेशलिस्ट श्रेणी में आता है। वर्तमान व्यवस्था में अस्पतालों में तैनात फिजिशियन हृदय संबंधी मरीजों की जांच और प्राथमिक उपचार करते हैं। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को उनकी जरूरत के अनुसार उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया जाता है। अल्मोड़ा में कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ की कमी ऐसे समय में चिंता का विषय है, जब पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए समय पर विशेषज्ञ उपचार तक पहुंच खुद एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ सेवाएं मजबूत होने से न केवल मरीजों को शुरुआती उपचार मिल सकेगा, बल्कि अनावश्यक रेफरल और लंबी दूरी की यात्रा का दबाव भी कम किया जा सकता है।