उत्तराखंड के साल जंगलों पर होपलो का खतरा, 3.96 लाख कीट नष्ट; हजारों पेड़ों पर संकट – Parvat Sankalp News

उत्तराखंड के साल जंगलों पर होपलो का खतरा, 3.96 लाख कीट नष्ट; हजारों पेड़ों पर संकट

देहरादून। उत्तराखंड के साल वनों में होपलो यानी साल बोरर (Hoplocerambyx spinicornis) का प्रकोप एक बार फिर वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। देहरादून और कालसी क्षेत्र के साल जंगलों में इस कीट की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी और नियंत्रण अभियान तेज कर दिया है। अभियान के तहत अब तक करीब 3.96 लाख वयस्क होपलो बीटल पकड़े और नष्ट किए जा चुके हैं। होपलो के प्रकोप से साल के पेड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग, उत्तराखंड वन विकास निगम और वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक डेडिकेटेड टास्क फोर्स गठित की गई है। यह टीम प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के साथ नियंत्रण अभियान की समीक्षा कर रही है।

लंबे समय से साल वनों में दर्ज होती रही है समस्या

वन विभाग के अनुसार, साल के जंगलों में होपलो का प्रकोप कोई नई समस्या नहीं है। उत्तराखंड में अलग-अलग समय पर इसके प्रकोप के मामले सामने आते रहे हैं। देहरादून क्षेत्र में 1916 से 1924, तिमली में 1958 से 1960 और थानो क्षेत्र में 1964-65 के दौरान होपलो के प्रकोप दर्ज किए गए थे। कालसी क्षेत्र में भी इस कीट की समस्या का ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध है। कालसी की स्वीकृत कार्ययोजना में 1934-35 से अलग-अलग अवसरों पर होपलो के प्रकोप का उल्लेख मिलता है। इसके नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक और सिल्वीकल्चर आधारित उपायों का भी प्रावधान किया गया है। होपलो का प्रकोप केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा है। वैज्ञानिक साहित्य में मध्य प्रदेश के मंडला और बालाघाट तथा वर्तमान छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और राजनांदगांव सहित देश के अन्य साल वन क्षेत्रों में भी अलग-अलग समय पर इसके बड़े प्रकोप का उल्लेख मिलता है।

कैसे साल के पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है होपलो?

होपलो का लार्वा मुख्य रूप से साल के पेड़ के तने और हृदयकाष्ठ को नुकसान पहुंचाता है। यदि शुरुआती स्तर पर कीट के प्रकोप की पहचान कर नियंत्रण नहीं किया जाए तो इसके तेजी से फैलने की आशंका रहती है। वन विभाग प्रभावित पेड़ों की पहचान, नियमित फील्ड मॉनिटरिंग, ट्रैप ट्री ऑपरेशन और वयस्क कीटों को पकड़कर नष्ट करने जैसे उपायों पर काम कर रहा है। इन उपायों का उद्देश्य होपलो की संख्या को नियंत्रित करना और उसके संभावित प्रसार को रोकना है।

3.96 लाख होपलो बीटल किए गए नष्ट

मौजूदा अभियान के दौरान देहरादून और कालसी क्षेत्र में अब तक करीब 3.96 लाख वयस्क होपलो बीटल पकड़े और नष्ट किए जा चुके हैं। वन विभाग का कहना है कि नियंत्रण अभियान भारत सरकार से प्राप्त आवश्यक अनुमतियों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप चलाया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में लगातार फील्ड मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि नए प्रभावित पेड़ों और कीटों की गतिविधियों का समय रहते पता लगाया जा सके।

वन विभाग, निगम और FRI के विशेषज्ञ कर रहे निगरानी

होपलो के प्रकोप से निपटने के लिए गठित टास्क फोर्स में वन विभाग, उत्तराखंड वन विकास निगम और देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के विशेषज्ञ शामिल हैं। टास्क फोर्स प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के साथ अभियान की प्रगति की समीक्षा कर रही है। इसके अलावा होपलो के नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक संस्थानों की तकनीकी सलाह भी ली जा रही है। वन विभाग का प्रयास है कि केवल मौजूदा प्रकोप को नियंत्रित करने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि भविष्य में साल के जंगलों को इस तरह के कीट प्रकोप से बचाने के लिए भी प्रभावी रणनीति तैयार की जाए।

प्रकोप के कारणों पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन

मौजूदा प्रकोप के कारणों, इसके फैलाव को प्रभावित करने वाले कारकों और भविष्य में प्रभावी नियंत्रण के उपायों का पता लगाने के लिए FRI के सहयोग से शोध परियोजना तैयार की जा रही है। इस अध्ययन के जरिए यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि वर्तमान समय में होपलो के प्रकोप को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारण क्या हैं और साल के जंगलों में इसके प्रभाव को लंबे समय तक कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।

हजारों पेड़ों को काटने की स्थिति से बचाने की चुनौती

होपलो के बढ़ते प्रकोप के बीच वन विभाग के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर प्रभावित क्षेत्रों में कीटों की संख्या को नियंत्रित करना है, वहीं दूसरी ओर इसके दूसरे साल वन क्षेत्रों में फैलने की संभावना को रोकना भी जरूरी है। वन विभाग की प्राथमिकता प्रभावित पेड़ों की समय पर पहचान और वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रण करने की है, ताकि प्रकोप को बड़े क्षेत्र में फैलने से रोका जा सके। वन संरक्षक शिवालिक राजीव धीमान के अनुसार, होपलो नियंत्रण से जुड़ी पूरी कार्रवाई स्वीकृत कार्ययोजना, निर्धारित वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और विशेषज्ञ संस्थानों की तकनीकी सलाह के अनुरूप की जा रही है। विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और आवश्यकता के अनुसार नियंत्रण अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तराखंड के साल वन राज्य की महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा का हिस्सा हैं। ऐसे में होपलो के प्रकोप पर प्रभावी नियंत्रण और इसके दीर्घकालीन प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक अध्ययन तथा लगातार निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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