गौला नदी में जल्द शुरू हो सकता है खनन, 7 हजार से अधिक वाहन और हजारों मजदूरों को मिलेगी राहत

हल्द्वानी: राज्य सरकार के लिए प्रमुख राजस्व स्रोतों में शामिल गौला नदी में एक बार फिर खनन गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने वन विभाग और वन निगम के अधिकारियों को खनन शुरू करने से पहले जरूरी तैयारियां जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के निर्देश के बाद संबंधित विभागों ने तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। गौला नदी में खनन शुरू होने का इंतजार लंबे समय से खनन कारोबार से जुड़े वाहन स्वामियों, मजदूरों और स्थानीय कारोबारियों को है। खनन गतिविधियां शुरू होने से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने के साथ ही हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों के कारोबार को भी रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
11 निकासी गेटों को दुरुस्त करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने गौला नदी के सभी 11 खनन निकासी गेटों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही खनन क्षेत्र तक पहुंचने वाले मार्गों को भी तैयार करने और आवश्यक मरम्मत कार्य जल्द पूरा करने को कहा गया है। प्रशासन की ओर से खनन क्षेत्र का सीमांकन पूरा करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। खनन शुरू होने से पहले जिन विभागीय और तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा किया जाना जरूरी है, उन्हें भी समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन के निर्देश के बाद वन विभाग और वन निगम के अधिकारी तैयारियों में जुट गए हैं। अब खनन शुरू करने से पहले जरूरी व्यवस्थाओं को पूरा करने की प्रक्रिया पर निगाहें टिकी हुई हैं।
7 हजार से अधिक वाहन खनन कारोबार से जुड़े
गौला नदी में खनन गतिविधियों का दायरा काफी बड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गौला में खनन के लिए 7 हजार से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। इन वाहनों के संचालन से बड़ी संख्या में वाहन स्वामियों, चालकों और अन्य लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। इसके अलावा खनन कार्य में हजारों मजदूर प्रत्यक्ष रूप से काम करते हैं। खनन शुरू होने के बाद इन मजदूरों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। खनन गतिविधियों से जुड़े परिवहन, मशीनरी, मरम्मत और अन्य छोटे-बड़े कारोबार भी इससे प्रभावित होते हैं।
स्टोन क्रशर और स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा फायदा
गौला नदी से निकलने वाले खनिज का इस्तेमाल निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यही वजह है कि नदी में खनन शुरू होने का असर केवल खनन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे जुड़े स्टोन क्रशर और निर्माण सामग्री के कारोबार पर भी पड़ता है। गौला से जुड़े क्षेत्र में कई स्टोन क्रशर संचालित होते हैं। खनन गतिविधियां शुरू होने के बाद इन इकाइयों को भी कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद रहती है। वहीं, हल्द्वानी और आसपास के बाजारों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। खनन से जुड़े वाहन, मजदूर और कारोबारी स्थानीय बाजारों में खर्च करते हैं, जिससे होटल, भोजनालय, ऑटोमोबाइल, स्पेयर पार्ट्स, पेट्रोल-डीजल और अन्य छोटे-बड़े कारोबारों को भी लाभ मिलने की संभावना रहती है।
सरकार को राजस्व बढ़ने की उम्मीद
गौला नदी में खनन शुरू होने से राज्य सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। गौला को राज्य के प्रमुख खनन राजस्व स्रोतों में गिना जाता है। खनन गतिविधियां शुरू होने पर सरकार को रॉयल्टी और अन्य माध्यमों से राजस्व प्राप्त होता है। स्थानीय स्तर पर गौला से जुड़े खनन कारोबार से करीब 500 करोड़ रुपये के व्यापार का दावा किया जाता है। हालांकि वास्तविक कारोबार और राजस्व का आंकड़ा खनन सत्र के दौरान होने वाली गतिविधियों और सरकारी आंकड़ों के आधार पर स्पष्ट होगा।
हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद
गौला नदी में खनन शुरू होने की खबर से खनन कारोबार से जुड़े लोगों में भी उम्मीद जगी है। वाहन स्वामियों से लेकर मजदूरों, स्टोन क्रशर संचालकों, परिवहन कारोबारियों और स्थानीय व्यापारियों तक इसका सीधा या अप्रत्यक्ष असर पड़ता है। अब प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी किए जाने के बाद खनन शुरू होने की तारीख को लेकर तस्वीर साफ होने का इंतजार है। यदि सभी आवश्यक औपचारिकताएं और व्यवस्थाएं समय पर पूरी होती हैं, तो गौला नदी में खनन गतिविधियां जल्द शुरू हो सकती हैं। फिलहाल जिलाधिकारी के निर्देश के बाद वन विभाग और वन निगम के सामने 11 निकासी गेट, संपर्क मार्ग, सीमांकन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को निर्धारित समय में पूरा करने की चुनौती है। गौला में खनन शुरू होने के साथ ही रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।




