राम शरण नौटियाल के BJP छोड़ने से उत्तराखंड में सियासी हलचल, कांग्रेस वापसी से लेकर बॉबी पंवार के साथ आने तक चर्चाएं तेज

उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले एक और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मशहूर बॉलीवुड पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल के पिता और जौनसार-बावर क्षेत्र के वरिष्ठ नेता राम शरण नौटियाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद खासतौर पर चकराता, पछवादून और आसपास के राजनीतिक क्षेत्रों में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राम शरण नौटियाल लंबे समय तक भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चकराता सीट से चुनाव लड़ा था और 27,417 वोट हासिल करते हुए दूसरे स्थान पर रहे थे। कांग्रेस के प्रत्याशी प्रीतम सिंह को 36,853 वोट मिले थे।
12 साल बाद BJP से अलग हुए राम शरण नौटियाल
राम शरण नौटियाल के भाजपा छोड़ने के फैसले ने उत्तराखंड की सियासत में चर्चा बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला ऐसे समय में लिया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से हुई थी। बाद में वर्ष 2014 में उन्होंने भाजपा का रुख किया था। अब उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस में वापसी की संभावनाओं को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि अभी तक उनकी ओर से किसी पार्टी में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
ईमेल के जरिए प्रदेश अध्यक्ष को भेजा इस्तीफा
राम शरण नौटियाल के इस्तीफे को लेकर शुरुआत में भाजपा प्रदेश नेतृत्व की ओर से औपचारिक पत्र मिलने की जानकारी नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद नौटियाल ने बताया कि उन्होंने ईमेल के माध्यम से प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को अपना इस्तीफा भेज दिया है। उनके भाजपा से अलग होने के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर है।
कांग्रेस में वापसी की अटकलें, लेकिन फैसला अभी बाकी
राम शरण नौटियाल का पुराना कांग्रेस से जुड़ाव होने के कारण उनके दोबारा कांग्रेस में जाने की संभावना को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अभी तक उन्होंने अपनी अगली राजनीतिक दिशा को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। यदि भविष्य में वह किसी राजनीतिक दल में शामिल होते हैं या स्वतंत्र रूप से चुनावी राजनीति में सक्रिय रहने का निर्णय लेते हैं, तो इसका सबसे सीधा राजनीतिक प्रभाव जौनसार-बावर और पछवादून क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक परिदृश्य के तौर पर ही देखा जा रहा है।
2022 में चकराता से लड़ा था विधानसभा चुनाव
राम शरण नौटियाल का चकराता की राजनीति में महत्वपूर्ण चुनावी रिकॉर्ड रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर उन्होंने 27,417 वोट हासिल किए थे और कांग्रेस के प्रीतम सिंह के बाद दूसरे स्थान पर रहे थे। प्रीतम सिंह ने 36,853 वोट हासिल कर 9,436 मतों के अंतर से चुनाव जीता था। यह आंकड़ा बताता है कि नौटियाल की चुनावी मौजूदगी चकराता सीट तक सीमित नहीं रही है और क्षेत्रीय राजनीति में उनका अपना राजनीतिक आधार रहा है। हालांकि किसी नेता के पुराने चुनावी प्रदर्शन के आधार पर आगामी चुनाव के संभावित परिणाम का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
बॉबी पंवार के साथ आने की भी चर्चा
राम शरण नौटियाल के भाजपा से अलग होने के बाद एक अन्य चर्चा बॉबी पंवार को लेकर भी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में टिहरी गढ़वाल सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले बॉबी पंवार ने कई विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन किया था।चकराता विधानसभा क्षेत्र में बॉबी पंवार को 26,983 वोट मिले और वह इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक वोट पाने वाले उम्मीदवार रहे। पुरोला में उन्हें 25,647 और यमुनोत्री में 21,602 वोट मिले थे। गंगोत्री में भी उन्हें 19,131 वोट मिले थे। इन चुनावी आंकड़ों के कारण राम शरण नौटियाल और बॉबी पंवार के बीच संभावित राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है, लेकिन दोनों के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक समझौते या गठजोड़ की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जौनसार-बावर से लेकर यमुनोत्री तक क्यों है चर्चा?
राम शरण नौटियाल का राजनीतिक प्रभाव मुख्य रूप से जौनसार-बावर क्षेत्र से जुड़ा रहा है। दूसरी ओर 2024 के लोकसभा चुनाव में बॉबी पंवार के प्रदर्शन के आंकड़ों में पुरोला, यमुनोत्री और चकराता जैसे क्षेत्रों में उनकी उल्लेखनीय मौजूदगी दिखाई देती है। इसी वजह से राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि यदि भविष्य में दोनों नेता किसी साझा राजनीतिक मंच पर दिखाई देते हैं, तो उसका क्षेत्रीय राजनीति पर क्या असर हो सकता है। फिलहाल यह केवल संभावित राजनीतिक समीकरण है और इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के रूप में नहीं देखा जा सकता।
अब सबकी नजर राम शरण नौटियाल के अगले कदम पर
राम शरण नौटियाल के भाजपा से इस्तीफे के बाद उत्तराखंड की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि उनकी अगली राजनीतिक पारी किस दिशा में जाएगी। क्या वह कांग्रेस में वापसी करेंगे? क्या किसी नए राजनीतिक मंच के साथ जुड़ेंगे? या फिर स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रखेंगे? इन सवालों का जवाब उनके अगले आधिकारिक ऐलान के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि उनके भाजपा से अलग होने के बाद चकराता और जौनसार-बावर क्षेत्र की राजनीति में एक नया राजनीतिक अध्याय जरूर खुला है। आगामी दिनों में उनकी राजनीतिक दिशा और नए समीकरणों को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।




