उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी, 8 लाख से ज्यादा मतदाता कम; अब छूटे नाम जोड़ने के लिए चलेगा विशेष अभियान

देहरादून: उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के बाद आखिरकार अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो गई है। हालांकि, अंतिम सूची जारी होने के साथ ही मतदाता पुनरीक्षण की कवायद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। भारत निर्वाचन आयोग ने SIR के दौरान पिछली मतदाता सूची में शामिल रहे लेकिन नई सूची में नहीं दिख रहे पात्र मतदाताओं की पहचान और दोबारा नामांकन के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड की ओर से भी 3 अक्टूबर को फाइनल रोल से संबंधित प्रेस नोट जारी किया गया है। वहीं, आयोग के नए निर्देशों के तहत बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं की स्थिति की जांच करेंगे, जिनके नाम पुरानी और वर्तमान सूची के बीच अंतर में सामने आए हैं। पात्र पाए जाने पर उनके नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

SIR के बाद कितनी हुई उत्तराखंड की मतदाता संख्या?

SIR शुरू होने के समय 8 जून 2026 को उत्तराखंड में कुल 79,60,762 मतदाता दर्ज थे। 14 जुलाई को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में यह संख्या घटकर 71,33,785 रह गई थी। अब 3 अक्टूबर को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में कुल 71,58,949 मतदाता हैं। यानी दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद ड्राफ्ट सूची की तुलना में 25,164 मतदाताओं की संख्या बढ़ी, लेकिन SIR की शुरुआत के मुकाबले अंतिम सूची में करीब 8.02 लाख कम मतदाता हैं। अंतिम सूची में 37,37,701 पुरुष, 34,21,036 महिलाएं और 212 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा 18-19 आयु वर्ग के 72,656 मतदाता और 80 वर्ष से अधिक उम्र के 1,22,892 मतदाता दर्ज हैं।

अब भी खत्म नहीं हुई नाम जोड़ने की प्रक्रिया

फाइनल रोल प्रकाशित होने के बाद चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जो प्री-SIR सूची में मौजूद थे लेकिन वर्तमान अंतिम सूची में नहीं हैं।

इसके तहत BLO पहले पुरानी और वर्तमान मतदाता सूची की तुलना करेंगे। इसके बाद चिन्हित मतदाताओं के घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति की जानकारी ली जाएगी। यदि संबंधित व्यक्ति पात्र पाया जाता है तो उसे मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए Form-6 के जरिए नामांकन की सुविधा दी जाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभियान केवल SIR में नाम गायब हुए मतदाताओं तक सीमित नहीं रहेगा। BLO घर-घर अभियान के दौरान पहली बार मतदान के योग्य हुए युवाओं और अन्य पात्र नए मतदाताओं को भी Form-6 के जरिए सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया में मदद करेंगे।

8.26 लाख से ज्यादा मतदाता ASDD श्रेणी में

SIR के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सामने आए जिनसे संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आंकड़ों के अनुसार 8,26,977 मतदाताओं को “uncollectable (ASDD)” श्रेणी में रखा गया था। यह SIR से पहले के कुल मतदाताओं का करीब 10.39 प्रतिशत था। जिलावार आंकड़ों में देहरादून में ऐसे मतदाताओं की संख्या 1,86,008, ऊधमसिंह नगर में 1,77,673 और हरिद्वार में 1,30,203 बताई गई है। इन आंकड़ों को लेकर SIR की प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दलों और अन्य पक्षों की ओर से अलग-अलग सवाल और दावे सामने आए थे। यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि ASDD श्रेणी में होना और अंतिम मतदाता सूची से नाम हट जाना एक ही बात नहीं है। अंतिम सूची में नाम जोड़ने, हटाने और दावे-आपत्तियों के निस्तारण के बाद वास्तविक आंकड़े तय हुए हैं।

दावे-आपत्तियों के बाद कितने नाम जुड़े और कितने हटे?

दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में Form-6 आवेदन भी आए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1,46,511 Form-6 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1,29,872 स्वीकार किए गए, जबकि 16,639 आवेदन खारिज हुए। वहीं Form-7 से जुड़े मामलों में कुल 1,93,890 मामले दर्ज हुए। इनमें 97,186 मामले “ineligible for final” और 89,182 मामले खारिज किए गए। अंतिम सूची के अनुसार नियमों के तहत कुल 1,04,708 मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसलिए SIR के दौरान सामने आए संभावित नामों की संख्या और अंतिम सूची में वास्तव में हटाए गए नामों के आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

चार जिलों में सबसे ज्यादा Form-7 आवेदन

SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए Form-7 के जरिए बड़ी संख्या में आवेदन भी आए। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कुल 1,30,382 Form-7 आवेदन दाखिल हुए थे। इनमें ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून और नैनीताल चार जिलों की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से ज्यादा रही। ऊधमसिंह नगर में 43,878, हरिद्वार में 29,369, देहरादून में 19,402 और नैनीताल में 18,301 Form-7 आवेदन दर्ज किए गए। हालांकि, Form-7 आवेदन दाखिल होने का अर्थ अपने आप मतदाता का नाम हट जाना नहीं है। नाम हटाने से पहले संबंधित दावे, आपत्तियों और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई।

अब BLO करेंगे घर-घर सत्यापन

चुनाव आयोग के नए निर्देशों के तहत BLO को प्री-SIR और वर्तमान मतदाता सूची की तुलना करके छूटे हुए मतदाताओं की सूची तैयार करनी है। इसके बाद घर-घर जाकर संबंधित व्यक्ति की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली जाएगी। पात्र मतदाता मिलने पर BLO Form-6 के जरिए नाम जोड़ने में सहायता करेंगे। अधिकारियों को इस अभियान में हर सप्ताह चिन्हित मतदाताओं की एक निर्धारित संख्या तक पहुंचने का लक्ष्य भी दिया गया है, ताकि विशेष अभियान को करीब एक महीने में पूरा किया जा सके। इसके अलावा जरूरत के अनुसार जिलों में विशेष कैंप और हेल्प डेस्क भी लगाए जाने हैं। रात में आश्रय लेने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीब और बेघर लोगों जैसे कमजोर वर्गों तक भी पहुंच बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

Form-6 को लेकर भी स्थिति हुई स्पष्ट

SIR के दौरान Form-6 के साथ इस्तेमाल किए गए अतिरिक्त घोषणा पत्र को लेकर भी सवाल उठे थे। अब CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि SIR चरण के दौरान इस्तेमाल किया गया यह अतिरिक्त घोषणा फॉर्म उसी विशेष प्रक्रिया के लिए था। SIR के बाद सामान्य मतदाता नामांकन प्रक्रिया में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया आगे भी निर्धारित चुनावी नियमों के तहत जारी रहेगी।

क्या फाइनल वोटर लिस्ट में आगे भी नाम जुड़ सकते हैं?

फाइनल मतदाता सूची प्रकाशित हो चुकी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पात्र व्यक्ति के लिए नाम जुड़वाने का रास्ता बंद हो गया है। चुनाव आयोग ने खुद SIR के बाद छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान और नामांकन के लिए विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसलिए उत्तराखंड की 3 अक्टूबर 2026 की फाइनल वोटर लिस्ट मौजूदा अंतिम रोल है, लेकिन पात्र मतदाताओं को शामिल करने की सामान्य चुनावी प्रक्रिया आगे भी चल सकती है। CEO उत्तराखंड की वेबसाइट पर SIR 2026, हटाए गए मतदाताओं और मतदाता सूची से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

मतदाताओं के लिए जरूरी बात

यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम नई मतदाता सूची में नहीं है, तो उसे केवल SIR के दौरान नाम हटने की बात मानकर चुप नहीं रहना चाहिए। चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल के माध्यम से नाम की स्थिति जांची जा सकती है और पात्रता के अनुसार संबंधित आवेदन प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

 

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