पूर्व DGP अशोक कुमार को हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के VC पद से इस्तीफा देने का आदेश, हाईकोर्ट के फैसले के बाद बोले- परिवार को देना चाहता था समय

उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक कुमार से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति (Vice Chancellor) पद पर उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें पद से इस्तीफा देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के मुताबिक इस्तीफा निर्धारित समयसीमा के भीतर देना होगा। अशोक कुमार की नियुक्ति को लेकर डॉ. डीएस मोर उर्फ देवेंद्र सिंह मोर और एक अन्य याचिकाकर्ता ने अदालत का रुख किया था। याचिका में उनकी नियुक्ति के साथ-साथ कुलपति के वेतन निर्धारण से संबंधित आदेश पर भी सवाल उठाए गए थे।
अशोक कुमार की VC नियुक्ति को दी गई थी चुनौती
उत्तराखंड के पूर्व DGP अशोक कुमार पुलिस सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति नियुक्त हुए थे। उनकी नियुक्ति को लेकर दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुलपति के पद पर उनकी नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया और कुलपति के वेतन निर्धारण से जुड़े पत्र को भी चुनौती दी गई थी। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए अशोक कुमार के इस्तीफे को लेकर निर्देश जारी किए।
तीन सप्ताह के भीतर इस्तीफा देने के निर्देश
कोर्ट के आदेश के अनुसार अशोक कुमार को तीन सप्ताह के भीतर कुलपति पद से इस्तीफा देना होगा। इसके साथ ही राज्य सरकार को भी आगे की व्यवस्था के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। अशोक कुमार के पद छोड़ने के बाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ डीन को अंतरिम व्यवस्था के तहत कुलपति की जिम्मेदारी संभालने को कहा गया है। इससे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज को आगे जारी रखने की व्यवस्था की गई है।
नियुक्ति और वेतन निर्धारण को लेकर था विवाद
इस पूरे मामले में मुख्य विवाद अशोक कुमार की कुलपति के तौर पर नियुक्ति और उनके वेतन निर्धारण से संबंधित प्रक्रिया को लेकर था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में नियुक्ति को नियमों के विपरीत बताते हुए इसे चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब अशोक कुमार के कुलपति पद पर बने रहने का रास्ता समाप्त हो गया है और उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर इस्तीफा देना होगा।
अशोक कुमार ने क्या कहा?
मामले पर पूर्व DGP अशोक कुमार का भी पक्ष सामने आया है। उनके अनुसार, उन्होंने पारिवारिक कारणों से पहले ही पद छोड़ने का मन बना लिया था। उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार को अधिक समय देना चाहते हैं और इस संबंध में सरकार से उनकी बातचीत भी हुई थी। अशोक कुमार के मुताबिक उनका कार्यकाल दिसंबर 2025 तक था। उनका कहना है कि पद छोड़ने का निर्णय केवल मौजूदा न्यायिक घटनाक्रम से जुड़ा नहीं था, बल्कि वह पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए भी पद से हटने पर विचार कर रहे थे।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब निर्धारित समयसीमा में इस्तीफा देने की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद वरिष्ठ डीन अंतरिम रूप से कुलपति की जिम्मेदारी संभालेंगे। विश्वविद्यालय में स्थायी व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई की जानी है। इस पूरे घटनाक्रम में अदालत का आदेश, नियुक्ति को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की दलील और अशोक कुमार का अपना पक्ष—तीनों अलग-अलग पहलू हैं। इसलिए नियुक्ति से जुड़े आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में उठाए गए सवालों और अदालत के आदेश के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।




